सौभाग्यप्रदाता अग्निदेव स्तुति | Saubhagya Pradata Agni Dev Stuti

सौभाग्यप्रदाता अग्निदेव स्तुति | i Dev StutiSaubhagya Pradata Agn

सौभाग्यप्रदाता अग्निदेव स्तुति | i Dev StutiSaubhagya Pradata Agn के बारे में अधिक जानकारी :

इस पुस्तक का नाम : सौभाग्यप्रदाता अग्निदेव स्तुति है | इस पुस्तक के लेखक हैं : Shri Raj Verma Ji | Shri Raj Verma Ji की अन्य पुस्तकें पढने के लिए क्लिक करें : | इस पुस्तक का कुल साइज 337.4 KB है | पुस्तक में कुल 9 पृष्ठ हैं |नीचे सौभाग्यप्रदाता अग्निदेव स्तुति का डाउनलोड लिंक दिया गया है जहाँ से आप इस पुस्तक को मुफ्त डाउनलोड कर सकते हैं | सौभाग्यप्रदाता अग्निदेव स्तुति पुस्तक की श्रेणियां हैं : dharm, Spirituality -Adhyatm

Name of the Book is : Saubhagya Pradata Agni Dev Stuti | This Book is written by Shri Raj Verma Ji | To Read and Download More Books written by Shri Raj Verma Ji in Hindi, Please Click : | The size of this book is 337.4 KB | This Book has 9 Pages | The Download link of the book "Saubhagya Pradata Agni Dev Stuti " is given above, you can downlaod Saubhagya Pradata Agni Dev Stuti from the above link for free | Saubhagya Pradata Agni Dev Stuti is posted under following categories dharm, Spirituality -Adhyatm |


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शान्ति ने कहा- समस्त प्राणियों के साधक महात्मा अनदेव को नमस्कार है। उनके एक, दो और पांच स्थान हैं। राजसूय-यज्ञ में छः स्वरूप धारण करते हैं। समस्त देवताओं को वृत्ति देने वाले अत्यन्त तेजस्वी अग्निदेव को नमस्कार है। जो सम्पूर्ण जगत् के कारणरूप तथा पालन करने वाले हैं, उन अग्निदेव को प्रणाम है। अग्ने! तुम सम्पूर्ण देवताओं के मुख हो। भगवन्! तुम्हारे द्वारा ग्रहण किया हुआ हविष्य सब देवताओं को तृप्त करता है। तुम्हीं समस्त देवताओं के प्राण हो। तुममें हवन किया हुआ हविष्य अत्यन्त पवित्र होता है, फिर वही मेघ बनकर जलरूप में परिणत हो जाता है।

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