पातंजल योग दर्शन तथा हरि भदरी योग वंशिका | Patanjal Yog Darshan Tatha Hari Bhadri Yog Vanshika

पातंजल योग दर्शन तथा हरि भदरी योग वंशिका | Patanjal Yog Darshan Tatha Hari Bhadri Yog Vanshika

पातंजल योग दर्शन तथा हरि भदरी योग वंशिका | Patanjal Yog Darshan Tatha Hari Bhadri Yog Vanshika के बारे में अधिक जानकारी :

इस पुस्तक का नाम : पातंजल योग दर्शन तथा हरि भदरी योग वंशिका है | इस पुस्तक के लेखक हैं : Vishard Yashovijayopadhyaya And Sukhalal | Vishard Yashovijayopadhyaya And Sukhalal की अन्य पुस्तकें पढने के लिए क्लिक करें : | इस पुस्तक का कुल साइज 2.98 MB है | पुस्तक में कुल 228 पृष्ठ हैं |नीचे पातंजल योग दर्शन तथा हरि भदरी योग वंशिका का डाउनलोड लिंक दिया गया है जहाँ से आप इस पुस्तक को मुफ्त डाउनलोड कर सकते हैं | पातंजल योग दर्शन तथा हरि भदरी योग वंशिका पुस्तक की श्रेणियां हैं : Knowledge

Name of the Book is : Patanjal Yog Darshan Tatha Hari Bhadri Yog Vanshika | This Book is written by Vishard Yashovijayopadhyaya And Sukhalal | To Read and Download More Books written by Vishard Yashovijayopadhyaya And Sukhalal in Hindi, Please Click : | The size of this book is 2.98 MB | This Book has 228 Pages | The Download link of the book "Patanjal Yog Darshan Tatha Hari Bhadri Yog Vanshika" is given above, you can downlaod Patanjal Yog Darshan Tatha Hari Bhadri Yog Vanshika from the above link for free | Patanjal Yog Darshan Tatha Hari Bhadri Yog Vanshika is posted under following categories Knowledge |


पुस्तक के लेखक :
पुस्तक की श्रेणी :
पुस्तक का साइज : 2.98 MB
कुल पृष्ठ : 228

Search On Amazon यदि इस पेज में कोई त्रुटी हो तो कृपया नीचे कमेन्ट में सूचित करें |
पुस्तक का एक अंश नीचे दिया गया है : यह अंश मशीनी टाइपिंग है, इसमें त्रुटियाँ संभव हैं, इसे पुस्तक का हिस्सा न माना जाये |

पाठकोंके समक्ष प्रस्तुत पुस्तक उपस्थित करते हुए इसको संक्षेप परिचय कराना जरूरी है। शुरूमें प्रस्तावना रूपमें योगदर्शन पर एक विस्तृत निबन्ध दे दिया गया है जिसमें योग तथा योग-सम्बन्धी साहित्य आदिसे सम्बन्ध रखनेवाली अनेक बातों पर संप्रमाण विचार किया गया है। तत्पश्चात् इस पुस्तकमें मुख्यतया योगसुप्रवृत्ति और सटीक योगबिशिका इन दो प्रन्योंका संग्रह है, तथा साथमें उनकी हिंदी सार भी दिया हुआ है। अतएव उक्त दोनों अन्धोका, उनके कती आदिका तथा हिंदी सारका कुछ परिचय कराना आघश्यक है |

You might also like

Leave A Reply

Your email address will not be published.