संस्कृत साहित्य का इतिहास संशोधित तथा संवर्धित | Sanskrit Sahitya Ka Itihas Sanshodhit Tatha Sanvrdhit

संस्कृत साहित्य का इतिहास संशोधित तथा संवर्धित | Sanskrit Sahitya Ka Itihas Sanshodhit Tatha Sanvrdhit

संस्कृत साहित्य का इतिहास संशोधित तथा संवर्धित | Sanskrit Sahitya Ka Itihas Sanshodhit Tatha Sanvrdhit के बारे में अधिक जानकारी :

इस पुस्तक का नाम : संस्कृत साहित्य का इतिहास संशोधित तथा संवर्धित है | इस पुस्तक के लेखक हैं : Hansraj Agrawal | Hansraj Agrawal की अन्य पुस्तकें पढने के लिए क्लिक करें : | इस पुस्तक का कुल साइज 11.28 MB है | पुस्तक में कुल 345 पृष्ठ हैं |नीचे संस्कृत साहित्य का इतिहास संशोधित तथा संवर्धित का डाउनलोड लिंक दिया गया है जहाँ से आप इस पुस्तक को मुफ्त डाउनलोड कर सकते हैं | संस्कृत साहित्य का इतिहास संशोधित तथा संवर्धित पुस्तक की श्रेणियां हैं : history

Name of the Book is : Sanskrit Sahitya Ka Itihas Sanshodhit Tatha Sanvrdhit | This Book is written by Hansraj Agrawal | To Read and Download More Books written by Hansraj Agrawal in Hindi, Please Click : | The size of this book is 11.28 MB | This Book has 345 Pages | The Download link of the book "Sanskrit Sahitya Ka Itihas Sanshodhit Tatha Sanvrdhit" is given above, you can downlaod Sanskrit Sahitya Ka Itihas Sanshodhit Tatha Sanvrdhit from the above link for free | Sanskrit Sahitya Ka Itihas Sanshodhit Tatha Sanvrdhit is posted under following categories history |


पुस्तक के लेखक :
पुस्तक की श्रेणी :
पुस्तक का साइज : 11.28 MB
कुल पृष्ठ : 345

Search On Amazon यदि इस पेज में कोई त्रुटी हो तो कृपया नीचे कमेन्ट में सूचित करें |
पुस्तक का एक अंश नीचे दिया गया है : यह अंश मशीनी टाइपिंग है, इसमें त्रुटियाँ संभव हैं, इसे पुस्तक का हिस्सा न माना जाये |

संस्कृत-साहित्य विशाल और अनेकांगी है। जितने कात तक इसके साहित्य का निर्माण होता रहा है उतने काल तक जगत् में किसी अन्य साहित्य का नहीं। मौलिक मूल्य में यह किसी से दूसरे नम्बर पर नहीं हैं । इतिहास को लेकर ही संस्कृत-साहित्य त्रुटिपूर्ण समझा जाता हैं । राजनीतिक इतिद्दास के सम्बन्ध से तो यह तथाकथित त्रुटि बिस्कुल भी सिद्ध नहीं होती राजतरंगिणी है ख्यातनामा लेखक कल्हण ने लिखा हैं कि मैंने राजा का इतिहास लिखने के लिए अपने से पहले के ग्यारह इतिहास-ग्रन्थ देखे हैं और मैंने राजकीय लेग्व-संग्रहालयों में अनेक ऐसे इतिहास-ग्रन्थ देखे हैं जिन्हें कीदों ने खो ढाला है, अतः अपाय होने के कारण मैं पूर्णतया उपयोग में नहीं लाए जा सके हैं ।

You might also like

Leave A Reply

Your email address will not be published.