संयुत्तनिकायपालि एक अध्ययन | Sanyuttanikayapali Ek Adhyayan

संयुत्तनिकायपालि एक अध्ययन | Sanyuttanikayapali Ek Adhyayan

संयुत्तनिकायपालि एक अध्ययन | Sanyuttanikayapali Ek Adhyayan के बारे में अधिक जानकारी :

इस पुस्तक का नाम : संयुत्तनिकायपालि एक अध्ययन है | इस पुस्तक के लेखक हैं : Dr. Vijaykumar Jain | Dr. Vijaykumar Jain की अन्य पुस्तकें पढने के लिए क्लिक करें : | इस पुस्तक का कुल साइज 45.4 MB है | पुस्तक में कुल 224 पृष्ठ हैं |नीचे संयुत्तनिकायपालि एक अध्ययन का डाउनलोड लिंक दिया गया है जहाँ से आप इस पुस्तक को मुफ्त डाउनलोड कर सकते हैं | संयुत्तनिकायपालि एक अध्ययन पुस्तक की श्रेणियां हैं : dharm, literature

Name of the Book is : Sanyuttanikayapali Ek Adhyayan | This Book is written by Dr. Vijaykumar Jain | To Read and Download More Books written by Dr. Vijaykumar Jain in Hindi, Please Click : | The size of this book is 45.4 MB | This Book has 224 Pages | The Download link of the book "Sanyuttanikayapali Ek Adhyayan " is given above, you can downlaod Sanyuttanikayapali Ek Adhyayan from the above link for free | Sanyuttanikayapali Ek Adhyayan is posted under following categories dharm, literature |


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पुस्तक का साइज : 45.4 MB
कुल पृष्ठ : 224

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बौद्ध धर्म एवं दर्शन सम्बन्धी विशाल साहित्य आज संसार की विभिन्न भाषाओं में उपलब्ध है। भारत में भी त्रिपिटक के मूलग्रन्थ एवं अनुवाद ग्रन्थ अधिकांशतया प्रकाशित हो चुके हैं और इनके ग्रन्थों का स्वतंत्र अनुसन्धान भी हो रहा । है। परन्तु 'संयुत्तनिकाय' का अभी तक विस्तार से कोई अध्ययन नहीं हुआ था। यद्यपि विभिन्न इतिहासविदों ने इसके महत्त्व की ओर ध्यान आकृष्ट किया है तथा इसके सन्दर्भो के आधार पर पालि साहित्य का महत्त्व प्रतिपादित किया है तथापि यह अन्य निकायों की अपेक्षा उपेक्षित ही रहा है।

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