स्वामी कृर्तिकेनुप्रेक्षा | Savami Kartikenupreksha

स्वामी कृर्तिकेनुप्रेक्षा | Savami Kartikenupreksha

स्वामी कृर्तिकेनुप्रेक्षा | Savami Kartikenupreksha के बारे में अधिक जानकारी :

इस पुस्तक का नाम : स्वामी कृर्तिकेनुप्रेक्षा है | इस पुस्तक के लेखक हैं : Savargiye Pt. Jaychandraji | Savargiye Pt. Jaychandraji की अन्य पुस्तकें पढने के लिए क्लिक करें : | इस पुस्तक का कुल साइज 4.7 MB है | पुस्तक में कुल 310 पृष्ठ हैं |नीचे स्वामी कृर्तिकेनुप्रेक्षा का डाउनलोड लिंक दिया गया है जहाँ से आप इस पुस्तक को मुफ्त डाउनलोड कर सकते हैं | स्वामी कृर्तिकेनुप्रेक्षा पुस्तक की श्रेणियां हैं : inspirational

Name of the Book is : Savami Kartikenupreksha | This Book is written by Savargiye Pt. Jaychandraji | To Read and Download More Books written by Savargiye Pt. Jaychandraji in Hindi, Please Click : | The size of this book is 4.7 MB | This Book has 310 Pages | The Download link of the book "Savami Kartikenupreksha" is given above, you can downlaod Savami Kartikenupreksha from the above link for free | Savami Kartikenupreksha is posted under following categories inspirational |


पुस्तक के लेखक :
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पुस्तक का साइज : 4.7 MB
कुल पृष्ठ : 310

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इस थपर एक टीका हो। यद्यक गथके कप्ता जगप्रसिद्ध दिगमरजे नाचार्य वाग्भट्ट विरचित है जिसका पिसेनसाहव तथा यूथरा एव की किसी रिपोर्ट में किय( गया है उसके आदि अत इलेक छपे हुये एकवार हमारे देशनैर्म आये थे । इसरी टीका-पद्मनी आचार्यकै पट्ट पर सुशोभित त्रैविञ्चविद्याधर-भाषाविचक्रवर्ति भट्टारक शुभचन्द्राचार्य सागवाडी पट्टाधीशकृत हैं जिसमें अनेक प्राचीन जैनप्रयांक प्रमाणसे ७००० इनमें विस्तृतव्याख्या की हैं तीसरे-किसी महाशयने प्राकृत पदवी संस्कृत छाया लिखी है इसके शिवाय एक प्राचीन गुजर भाषामि ति टिप्पणिमय भी प्राप्त हुवा है ।

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