शकुन्तला नाटक | Shakuntala Natak

शकुन्तला नाटक | Shakuntala Natak

शकुन्तला नाटक | Shakuntala Natak के बारे में अधिक जानकारी :

इस पुस्तक का नाम : शकुन्तला नाटक है | इस पुस्तक के लेखक हैं : Unknown | Unknown की अन्य पुस्तकें पढने के लिए क्लिक करें : | इस पुस्तक का कुल साइज 02.2 MB है | पुस्तक में कुल 94 पृष्ठ हैं |नीचे शकुन्तला नाटक का डाउनलोड लिंक दिया गया है जहाँ से आप इस पुस्तक को मुफ्त डाउनलोड कर सकते हैं | शकुन्तला नाटक पुस्तक की श्रेणियां हैं : comedy

Name of the Book is : Shakuntala Natak | This Book is written by Unknown | To Read and Download More Books written by Unknown in Hindi, Please Click : | The size of this book is 02.2 MB | This Book has 94 Pages | The Download link of the book "Shakuntala Natak" is given above, you can downlaod Shakuntala Natak from the above link for free | Shakuntala Natak is posted under following categories comedy |


पुस्तक के लेखक :
पुस्तक की श्रेणी :
पुस्तक का साइज : 02.2 MB
कुल पृष्ठ : 94

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माव्य-(ऊँची श्वास लेकर) इस मृगयाशील राजा की मित्रता से हरि हम ती बड़े दुखी हैं दुपहरी में भी यह मूग या वह वाराह गया उधर शादुल जाता है यही कहने इस वन से उस में इससे इसमें भागना पड़ता है ग्रीपम में कहीं वृक्ष की छाया भी इतनी नहीं मिलती जहाँ कुछ विश्राम लिया जाय । पहाड़े को नदियों में वृक्षों के पत्ते गिर कर सड़ गये हैं। प्यास लगे त। उन्हीं का चेम्वाद पानी पीना पड़ता है और खाने को बहुधा गल पर भुना हुया माँस मिलता है सो भी कुसमय । घोड़े के साथ दीड़ने दौड़ने देह ऐसी शिथिल हो जाती है |

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