श्री सनातनधर्म शिक्षा भाग- १ | Shri Snatan Dharm Siksha Part- 1

श्री सनातनधर्म शिक्षा भाग- १ | Shri Snatan Dharm Siksha Part- 1

श्री सनातनधर्म शिक्षा भाग- १ | Shri Snatan Dharm Siksha Part- 1 के बारे में अधिक जानकारी :

इस पुस्तक का नाम : श्री सनातनधर्म शिक्षा भाग- १ है | इस पुस्तक के लेखक हैं : Pandit Ramsvrup Sharma | Pandit Ramsvrup Sharma की अन्य पुस्तकें पढने के लिए क्लिक करें : | इस पुस्तक का कुल साइज 52.7 MB है | पुस्तक में कुल 220 पृष्ठ हैं |नीचे श्री सनातनधर्म शिक्षा भाग- १ का डाउनलोड लिंक दिया गया है जहाँ से आप इस पुस्तक को मुफ्त डाउनलोड कर सकते हैं | श्री सनातनधर्म शिक्षा भाग- १ पुस्तक की श्रेणियां हैं : dharm

Name of the Book is : Shri Snatan Dharm Siksha Part- 1 | This Book is written by Pandit Ramsvrup Sharma | To Read and Download More Books written by Pandit Ramsvrup Sharma in Hindi, Please Click : | The size of this book is 52.7 MB | This Book has 220 Pages | The Download link of the book "Shri Snatan Dharm Siksha Part- 1" is given above, you can downlaod Shri Snatan Dharm Siksha Part- 1 from the above link for free | Shri Snatan Dharm Siksha Part- 1 is posted under following categories dharm |


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पुस्तक का साइज : 52.7 MB
कुल पृष्ठ : 220

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जिस मानदण्डके द्वारा क्रमबिकाश की वर्त्तमान अवस्था में कर्मका विचार कियाजाता है, उसका नाम समन्वय योग है । अधिकतर जीव इस समय भी इस अवस्था में अकिर नहीं पहुंचे हैं अधिकांश स्थानों में इसके द्वारा एकत्व घटित होगा या नहीं इस एक प्रश्नके द्वारा ही हम कर्मकी परीक्षा कर सकते हैं । यदि प्रश्न का उत्तर हाँ धो तो वह सत् कर्म है नहीं तो असत् कर्म है, इसी लिए प्रथम अध्याय में लिखा जाचुका है कि-धर्मनीतिकी सहायता से मनुष्य परस्पर के साथ प्रेमभावसे रह सकते हैं प्रेम भावके साथ रहना ही एकत्व का प्रयोजक है ।

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