श्रीविद्या-कल्पलता | Shrividya Kalplata

श्रीविद्या-कल्पलता | Shrividya Kalplata

श्रीविद्या-कल्पलता | Shrividya Kalplata के बारे में अधिक जानकारी :

इस पुस्तक का नाम : श्रीविद्या-कल्पलता है | इस पुस्तक के लेखक हैं : Dr. Rajendra Ranjan Chaturvedi | Dr. Rajendra Ranjan Chaturvedi की अन्य पुस्तकें पढने के लिए क्लिक करें : | इस पुस्तक का कुल साइज 68.1 MB है | पुस्तक में कुल 245 पृष्ठ हैं |नीचे श्रीविद्या-कल्पलता का डाउनलोड लिंक दिया गया है जहाँ से आप इस पुस्तक को मुफ्त डाउनलोड कर सकते हैं | श्रीविद्या-कल्पलता पुस्तक की श्रेणियां हैं : Spirituality -Adhyatm

Name of the Book is : Shrividya Kalplata | This Book is written by Dr. Rajendra Ranjan Chaturvedi | To Read and Download More Books written by Dr. Rajendra Ranjan Chaturvedi in Hindi, Please Click : | The size of this book is 68.1 MB | This Book has 245 Pages | The Download link of the book " Shrividya Kalplata" is given above, you can downlaod Shrividya Kalplata from the above link for free | Shrividya Kalplata is posted under following categories Spirituality -Adhyatm |


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पुस्तक का साइज : 68.1 MB
कुल पृष्ठ : 245

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तन्त्रशास्त्र की परंपरा वैदिक-परंपरा की तरह ही गहन और व्यापक है। वेद की परंपरा का स्रोत चतुर्मुख ब्रह्मा को माना जाता है, वहीं तन्त्र का स्रोत पंचवक्त्र-त्रिनेत्र शिव हैं। भारतीय जन-जीवन के आंगन में ये दोनों धारायें कहीं अलग सी दिखती हैं, तो कहीं मिली हुई सी हैं, कहीं एक दिखती हैं तो कहीं दो बन गयी हैं, कहीं गलबांहीं डाल कर निकली है। तो कहीं आमने-सामने खड़ी हैं परंतु यह निश्चित है कि दोनों परंपराओं ने प्रकृति और जीवन के गहन तत्त्व का प्रतिपादन किया है और दोनों परंपराओं ने एक दूसरे को प्रभावित भी किया है। तन्त्रशास्त्र को टोना-टोटका, टंटघंट और भूत-प्रेत, डाकिनी-पिशाचिनी द्वारा मारण-वशीकरण जैसी निम्नस्तर की कामनापूर्ति की विद्या समझना अंधविश्वास मात्र है और इसी अंधविश्वास के कारण इतने महत्वपूर्ण और विशाल तान्त्रिक- साहित्य की इतनी उपेक्षा होती रही है। वास्तव में तन्त्रशास्त्र चिंतन, विश्वास और जीवन की पद्धति है और उसका बहुत प्राचीन इतिहास है।

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