तैरते दीप | Tairte Deep

तैरते दीप : सुरेन्द्र नूतन हिंदी काव्य पुस्तक मुफ्त डाउनलोड | Tairte Deep : Surendra Nootan Hindi Book Free Download

तैरते दीप : सुरेन्द्र नूतन हिंदी काव्य पुस्तक मुफ्त डाउनलोड | Tairte Deep : Surendra Nootan Hindi Book Free Download के बारे में अधिक जानकारी :

इस पुस्तक का नाम : तैरते दीप है | इस पुस्तक के लेखक हैं : Surendra Nath Nootan | Surendra Nath Nootan की अन्य पुस्तकें पढने के लिए क्लिक करें : | इस पुस्तक का कुल साइज 2.17 MB है | पुस्तक में कुल 67 पृष्ठ हैं |नीचे तैरते दीप का डाउनलोड लिंक दिया गया है जहाँ से आप इस पुस्तक को मुफ्त डाउनलोड कर सकते हैं | तैरते दीप पुस्तक की श्रेणियां हैं : Poetry, Uncategorized

Name of the Book is : Tairte Deep | This Book is written by Surendra Nath Nootan | To Read and Download More Books written by Surendra Nath Nootan in Hindi, Please Click : | The size of this book is 2.17 MB | This Book has 67 Pages | The Download link of the book "Tairte Deep" is given above, you can downlaod Tairte Deep from the above link for free | Tairte Deep is posted under following categories Poetry, Uncategorized |


पुस्तक के लेखक :
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पुस्तक का साइज : 2.17 MB
कुल पृष्ठ : 67

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म्रस्तावना हिन्दी कविता को प्रतिभावान एवं अनुभूतिशील व्यक्तियों नें समय समय पर काल परिस्थिति के अनुसार परिभाषित किया है परन्तु इंन सारी विचार धाराओं में एक आर्य सन्य ग्हा है और वह यह कि काव्य मानव संवेदनाओं की सुकष्मतम अभिव्यक्ति करता रहा है। काव्य मनुष्य जीवन के अनुभव को सुन्दर रूपों में प्रकट करने का सशक्त माध्यम रहा है। कवि अपने युग कीं वास्तविकता को भी अनदेखा नहीं करता उसकी वाणी में असंख्य पाठक अपनी भावनाओं और विचारों का प्रतिविम्व पाने हैं। उसकी रचना में अपने जीवन अनुभव को एक नये रूप में देखने का प्रयास करते हैं। अतः काव्य जीवन का अनुकरण है उसका निरूपण है। काव्य हमें जीवन का मर्म समझाने मे सहायक होता है। जीवन के प्रति वह सहख्र दृष्टियाँ रख सकता है उसमे आस्था अथवा अनास्था प्रकट कर सकता है। अतः हम देखते हैं कि दर युग में महान काव्य ने शिष्ट और शिक्षित वर्ग की परिधि को फार करके असख्य जनता का स्रेह और सम्मान प्राप्त किया है। गहरी अनुभूति से ही काव्य के पाठक का मन द्रवित्त विंचलित और व्यधित होता है। भाषा-शिल्प उपमाएं संगीत आदि काव्य के साधन मात्र हो सकते हैं वे काव्य के अलंकार हो सकते हैं साध्य नहीं। उत्कृष्ट काव्य प्राण-रस मानवीय अनुभूति गहरी संवेदना तथा मानव जीवन का मर्मस्पर्शी निरूपण की अभिव्यक्ति करता ही दुष्टिगोचर होता है। पाश्चात्य काव्य का ऊन्ये अनुकरण में अनेक कवि प्रतीकों की नवीनता तथा शब्दों के जोड़ को सर्वस्य समझ रहे हैं इन शब्दों और प्रतीकों का महत्व तभी हो सकता है जब इनके पीछे स्वस्थ मानवीय ऊनुभूति हो तथा जीवन को एक दृष्टि प्रदान करने की क्षमता हो जो जीवन को सासारिक दुखों से मुक्त दिला कर उसे आनन्द और शान्ति का मार्ग दिखाने की शक्ति रखे। शब्दों का आइम्वर और नया कुछ करने की धुन शव को अलंकृत्त करने के समान है भाषा-सौछव संगीत ताल-लय की चतुराई अलंकारों की अभिनव कारीगरी पश्चीकारी मीनाकारी अन्तत उन पर काव्य का सौन्दर्य निर्भर नहीं करता। श्रेष्ठ काव्य का निर्णय ऊन्ततः इस बात पर निर्भर होता है कि कवि मे कितनी गहरी जीवन दृष्टि पाई है। इंग्लैण्ड में नये रूपों और प्रयोगों की खोज में जेम्स जौयस ने लिखना छोड़ दियां था। वह स्वप्रों के समान अथवा कालकूट पीने के बाद शिवजी के समान भाषा का प्रयोग करने लगा था. डी एव लॉरिन्स भी

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