तलाश ए हक़ | Talash E Haq

तलाश ए हक़ : मसऊद अहमद हिंदी पुस्तक | Talash E Haq : Masaood Ahemad Hindi Book

तलाश ए हक़ : मसऊद अहमद हिंदी पुस्तक | Talash E Haq : Masaood Ahemad Hindi Book के बारे में अधिक जानकारी :

इस पुस्तक का नाम : तलाश ए हक़ है | इस पुस्तक के लेखक हैं : Masaood Ahemad | Masaood Ahemad की अन्य पुस्तकें पढने के लिए क्लिक करें : | इस पुस्तक का कुल साइज 6.9 MB है | पुस्तक में कुल 238 पृष्ठ हैं |नीचे तलाश ए हक़ का डाउनलोड लिंक दिया गया है जहाँ से आप इस पुस्तक को मुफ्त डाउनलोड कर सकते हैं | तलाश ए हक़ पुस्तक की श्रेणियां हैं : dharm, islam

Name of the Book is : Talash E Haq | This Book is written by Masaood Ahemad | To Read and Download More Books written by Masaood Ahemad in Hindi, Please Click : | The size of this book is 6.9 MB | This Book has 238 Pages | The Download link of the book "Talash E Haq" is given above, you can downlaod Talash E Haq from the above link for free | Talash E Haq is posted under following categories dharm, islam |


पुस्तक के लेखक :
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पुस्तक का साइज : 6.9 MB
कुल पृष्ठ : 238

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हर मुसलमान अहले हदीस होता है और हर अहले हदीस मुसलमान होता है अर्थात मुसलमान और अहले हदीस एक दूसरे के पूरक शब्द हैं, जो मुसलमान होगा वह जरूर अहले हदीस होगा और जो अहले हदीस होगा निश्चय ही मुसलमान होगा। कोई मुसलमान हदीसे रसूल स0 को माने बिना मुसलमान नहीं बन सकता, इस लिए अहले हदीस कहलाना किसी सम्प्रदाय में आने का विकल्प नहीं है बल्कि यह मुसलमानों ही की उस असल जमाअत का ग्रणात्मक नाम है जो दूसरों के कथन कयास और राय पर हदीस नबवी सल्ल0 को वरीयता देती है। याद रहे अहले हदीस। के तीन ग्रंणात्मक नाम और भी हैं जो अहले हदीस के अकीदों और विचारों को फैलाने का कारण हैं, वे यह हैं।"L" " A","
और "------'' (देखिए फज़ाइले अहले हदीस पर किताब "शर्फ असहाबुल हदीस लेखक अल्लामा इमाम खतीब रह0 मुहद्दिस बगदादी)
सैंकड़ों ऐसे लोग हैं जिन के जाती नाम कुछ और हैं मगर वह सिफाती नाम ही से ज्यादा मशहूर हैं या पुकारे जाते हैं और लोग उन का अल ज़ाती नाम लेने की बजाए अबु बकर रजि0, अबू हुरैरह रजि0, सैफुल्लाह रजि०, अबु उबैदा रज़ि) कह कर पुकारते है। और आप उसे बुरा नहीं समझे मगर अहले हदीस का यह सिफाती नाम आप को बहुत बुरा गुजरता है। आखिर इस की वजह क्या है? कुछ तो स्वयं भी ठंडे दिल से सोचो और कुछ अपनी जगह भी इंसाफ़ से काम लो कि तुम क्या कहते हो और क्या करते हो?
अतः आओ! अगर सब मुसलमानों को एक पलेट फार्म पर लाना है तो उन्हें एक ही झंडे तले जमा करने की कोशिश करो और वह झंडा वही है जो अहले हदीस पेश कर रहे हैं

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