तीस दिन मालवीय जी के साथ | Tees Din Maalviy G ke Sath

तीस दिन मालवीय जी के साथ : श्री रामनरेश त्रिपाठी | Tees Din Maalviy G ke Sath : Shri Ramnaresh Tripathi

तीस दिन मालवीय जी के साथ : श्री रामनरेश त्रिपाठी | Tees Din Maalviy G ke Sath : Shri Ramnaresh Tripathi के बारे में अधिक जानकारी :

इस पुस्तक का नाम : तीस दिन मालवीय जी के साथ है | इस पुस्तक के लेखक हैं : Shri Ramnaresh Tripathi | Shri Ramnaresh Tripathi की अन्य पुस्तकें पढने के लिए क्लिक करें : | इस पुस्तक का कुल साइज 11.7 MB है | पुस्तक में कुल 383 पृष्ठ हैं |नीचे तीस दिन मालवीय जी के साथ का डाउनलोड लिंक दिया गया है जहाँ से आप इस पुस्तक को मुफ्त डाउनलोड कर सकते हैं | तीस दिन मालवीय जी के साथ पुस्तक की श्रेणियां हैं : Biography, Stories, Novels & Plays

Name of the Book is : Tees Din Maalviy G ke Sath | This Book is written by Shri Ramnaresh Tripathi | To Read and Download More Books written by Shri Ramnaresh Tripathi in Hindi, Please Click : | The size of this book is 11.7 MB | This Book has 383 Pages | The Download link of the book "Tees Din Maalviy G ke Sath" is given above, you can downlaod Tees Din Maalviy G ke Sath from the above link for free | Tees Din Maalviy G ke Sath is posted under following categories Biography, Stories, Novels & Plays |


पुस्तक के लेखक :
पुस्तक की श्रेणी : ,
पुस्तक का साइज : 11.7 MB
कुल पृष्ठ : 383

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सवेरे महाराज की तबीयत अच्छी नहीं थी, पेट में दर्द था । इससे चलने-फिरने की उनकी इच्छा नहीं थी । पर आज रविवार था । गीता-प्रवचन में जाना था । सवेरे अस्वस्थता के कारण नित्य-क्रिया में कुछ देर होगयी थी; फिर भी ये ९ बजे
तक ‘प्रवचन' में पहुँच ही गये ।। | वहाँ से झार्म और गोशाला देखने गये । लौटकर आये तो उनी पीठ और जॉच में 5 इई हो रहा था।
एक दर्जन के करीब मिलनेवाले प्रतीक्षा कर रहे थे । महाराय ने आते ही उन्हें एक-एक करके बुलाया और सबसे बातें कीं । उनसे छुट्टी मिली तो उन्होंने विश्वविद्यालय के एक फर्मचारी को बुलाकर एक विज्ञप्ति लिखवायी, जिसके अनुसार गीताप्रवचन में विद्यार्थियों का उपस्थित होना अनिवार्य किया जाय। फिर महाराज ने उक्त कर्मचारी को आदेश किया कि अह्
गायनाचार्य को कल साथ लेकर भावें । महान चाहते हैं कि | प्रत्येक छात्र को, जो विश्वविद्यालय से निकलकर घर जाय, इमसे-कम ६ बाग र १२ रागिनियों का शान अवश्य करा दिया जाय। और अपनी सचि के अनुसार कोई बाजा जैसे सितार, तबला, वीणा, हारमोनियम में से कम-से-आ एक यह जरूर सीख छ । | इसके लिए प्रत्येक होस्टल में एक संगीत संघ खोला जाय।
मैने सुन रफ्ना था कि महाराज सन् १८८५ में जब

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