विषलता | Vishlata

विषलता : लाल, शिवचरण अनु | Vishlata : Lal, Shivcharan Anu

विषलता : लाल, शिवचरण अनु | Vishlata : Lal, Shivcharan Anu के बारे में अधिक जानकारी :

इस पुस्तक का नाम : विषलता है | इस पुस्तक के लेखक हैं : | की अन्य पुस्तकें पढने के लिए क्लिक करें : | इस पुस्तक का कुल साइज 3.1MB है | पुस्तक में कुल 114 पृष्ठ हैं |नीचे विषलता का डाउनलोड लिंक दिया गया है जहाँ से आप इस पुस्तक को मुफ्त डाउनलोड कर सकते हैं | विषलता पुस्तक की श्रेणियां हैं : hindu

Name of the Book is : Vishlata | This Book is written by | To Read and Download More Books written by in Hindi, Please Click : | The size of this book is 3.1MB | This Book has 114 Pages | The Download link of the book "Vishlata" is given above, you can downlaod Vishlata from the above link for free | Vishlata is posted under following categories hindu |


पुस्तक की श्रेणी :
पुस्तक का साइज : 3.1MB
कुल पृष्ठ : 114

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स्त्रियों में ऐसा परदा नही है जैसा कि पज्ञाय और गुरूपदेश है। भारतवासी मैगस्थनीजके कहे अनुसार मे इनती, साहसी, अदालत में जाने से पवने वाले और शान्ति चाहने वाले थे। टाइ साहब अपनी राजस्थान नामी किताब में, आइजफ़ज़ज़ की गहरीर का इवा। देते हुंए लिखते हैं कि "हिन्दू बड़े धार्मिक, सभ्य, मुव्यतदार, ख़ातिर फरनेवाले, विद्या के शौकीन' न्याय और होशियार अर्थात् संव अच्छे गुणों से भरपूर हैं। सकामों में भरोसे के योग्य, दुःख्न मैं धीरज धरनेवाले
ओर उनके सिपाही मैदान में मरने मारनेवाले हैं । मगर अफ़स अकबर के बाद मुसलमानों ने उन की वफ़ादा
, ईमानदारी भीर सच्चाई से बुराफ़ायदा उठाया। भारत वासियों पर प्रेवफाई का फलङ लगाया जाताहै । लेकिन भारतवासी अपने उपकारी के सद। कृतश रहे हैं ।
न्हेवर का बयान है कि-"भारतवासियों से बढ़कर दुनिया में कोई भी पादः गंभीर नहीं है । घह बहुत ही प्रसन्नचित्त, साहसी और शायद तमाम इंसानों में वही से हैं जो अपने पड़ोसी को भी दुःख देना नहीं चाहते" । सर मोनियर विलियम अपनी मौडनं इण्डियः -ऐण्ड इएिडवन्स में लिखते हैं कि भारतबास कभी भी जान बूझ कर किसी की हत्या नहीं करते। वह किसी काङ्गरेज़ का चित्र प्रसन्न करने के लिये भी शिकार नहीं मारते, उनका कहना है कि अपने आपभी जीवित रहो, और छोटे जी को भी जीता, रहने दो" । दुर्भाग्य से

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