निष्काम कर्म योगांक | Nishkam karma Yogank

निष्काम कर्म योगांक : गीता प्रेस | Nishkam karma Yogank : Geeta Press

निष्काम कर्म योगांक : गीता प्रेस | Nishkam karma Yogank : Geeta Press के बारे में अधिक जानकारी :

इस पुस्तक का नाम : निष्काम कर्म योगांक है | इस पुस्तक के लेखक हैं : Geeta Press | Geeta Press की अन्य पुस्तकें पढने के लिए क्लिक करें : | इस पुस्तक का कुल साइज 23.7 MB है | पुस्तक में कुल 306 पृष्ठ हैं |नीचे निष्काम कर्म योगांक का डाउनलोड लिंक दिया गया है जहाँ से आप इस पुस्तक को मुफ्त डाउनलोड कर सकते हैं | निष्काम कर्म योगांक पुस्तक की श्रेणियां हैं : dharm, gita-press

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पुस्तक का साइज : 23.7 MB
कुल पृष्ठ : 306

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व्यक्त किये हैं। इसपर शासीय विवेचना भी होती हिंसा, हत्या, छूट-पाट करनेके बाद भी रात्रि में या अन्त
रही है। यह ए इतना गम है कि सैद्धान्तिक और विश्राम चा शान्तिके लिये ही Pाफी शरण लेता हैं। | म्यामारक में विशाल अन्तर आ जाता है । मह गहरी नींदका प्रयास करता है और चाहता है
कर्मका प्रेरक उसके फलफी इच्छा होती है और गीता एकान्त | हिंसर जन्तु भी ऐसी ही शान्ति ते उस इडा विप-दन्त कर उसे तोड़ देता है। यह शान्ति सुकाम ममें नहीं है । कानाकी आदेश करती है; फिर कर्म किया ही क्यों जाय ! न कोई सीमा है और न उसच कहीं अन्त ही है। ह कहना जितना सरल है कि ‘फस्टेछ-हित होकर कामनाएँ—कलेच्छाएँ अनन्त हैं। तनी फलप्राप्ति होगी ही कर्म करे' उतना ही यह व्यवहारमें असम्भ-सा उतनी इझ ( बासना ) घबती जायगी---- भिषा कति प्रतीत होता है । पापि यह तो सुबिंबित कृष्णयमेव भूय एवाभिवर्धरो'। फतः हमें देणगी है कि 'कर्म करनाम्यत्र ही मनुष्य अराकी है कि फर्म ते वरना ही है, ६ मणीय भी है। धत हैं, फल तो सदा ईराधीन ही है, फिर भी अन उसके परिजम अनासक्त रहना है । हाँ मायाफ आपरण, अहंकारा जाल तथा नोदी रवा में अपनैको तथा अपने को जो मानिक इतनी पिस्तूत तथा मुद्दा है कि इससे निकलकर फाप्क है उस परमशशिमें समर्पित करना है । यह वरि आते-आते कोई भी अनित हो जाता है। अनसन अस ही कठिन है। या झगण।
अभ्यास से ही होगा । अम्बाससे भावनाको एक दार प्रतःकाल उठनेसे लेफर में प्रापन- जगह इह का होगा । य यह झिा 'पापर पर्यन्त कोई भी काम निष्काम नहीं होता है। प्रत्येक मिवाम्भसा' हो सकेगी।

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