व्याकरणतंत्र का काव्य शास्त्र पर प्रभाव | Vyakaran Tantra Ka Kavya Shastra Par Prabhav

व्याकरणतंत्र का काव्य शास्त्र पर प्रभाव | Vyakaran Tantra Ka Kavya Shastra Par Prabhav

व्याकरणतंत्र का काव्य शास्त्र पर प्रभाव | Vyakaran Tantra Ka Kavya Shastra Par Prabhav के बारे में अधिक जानकारी :

इस पुस्तक का नाम : व्याकरणतंत्र का काव्य शास्त्र पर प्रभाव है | इस पुस्तक के लेखक हैं : Hari Ram Mishra | Hari Ram Mishra की अन्य पुस्तकें पढने के लिए क्लिक करें : | इस पुस्तक का कुल साइज 15.0 MB है | पुस्तक में कुल 324 पृष्ठ हैं |नीचे व्याकरणतंत्र का काव्य शास्त्र पर प्रभाव का डाउनलोड लिंक दिया गया है जहाँ से आप इस पुस्तक को मुफ्त डाउनलोड कर सकते हैं | व्याकरणतंत्र का काव्य शास्त्र पर प्रभाव पुस्तक की श्रेणियां हैं : jyotish

Name of the Book is : Vyakaran Tantra Ka Kavya Shastra Par Prabhav | This Book is written by Hari Ram Mishra | To Read and Download More Books written by Hari Ram Mishra in Hindi, Please Click : | The size of this book is 15.0 MB | This Book has 324 Pages | The Download link of the book "Vyakaran Tantra Ka Kavya Shastra Par Prabhav" is given above, you can downlaod Vyakaran Tantra Ka Kavya Shastra Par Prabhav from the above link for free | Vyakaran Tantra Ka Kavya Shastra Par Prabhav is posted under following categories jyotish |


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पुस्तक का साइज : 15.0 MB
कुल पृष्ठ : 324

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भूतं भव्यं भयं चं सर्वं वेदात प्रसिदयति" इस भारतीय मान्यता के अनुसार अखिल ज्ञानराशि वेदों में समस्त विद्या का मूलस्वरूप विद्यमान है । वेद अपौरुषेय एवं नित्य होने के कारण भ्रम, प्रमाद विप्रलिप्सा अदि मानवीय दोषों से सर्व परे हैं । अतः वेदों में जिस विद्या का मूल स्वरूप प्राप्त है उसका प्रामाण्य स्वतः सिद्ध हो जाता है । इस दृष्टि से विचार करने पर यह स्पष्ट हो जाता है कि 'ध्याकरण का पदव्युत्पत्त्यात्मक मूलरूप वेदों में विद्यमान है ।

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