यजुर्वेद-सुभाषितावली | Yajurved Subhashitavali

यजुर्वेद-सुभाषितावली | Yajurved Subhashitavali

यजुर्वेद-सुभाषितावली | Yajurved Subhashitavali के बारे में अधिक जानकारी :

इस पुस्तक का नाम : यजुर्वेद-सुभाषितावली है | इस पुस्तक के लेखक हैं : Dr. Kapildev Dwivedi | Dr. Kapildev Dwivedi की अन्य पुस्तकें पढने के लिए क्लिक करें : | इस पुस्तक का कुल साइज 34.7 MB है | पुस्तक में कुल 210 पृष्ठ हैं |नीचे यजुर्वेद-सुभाषितावली का डाउनलोड लिंक दिया गया है जहाँ से आप इस पुस्तक को मुफ्त डाउनलोड कर सकते हैं | यजुर्वेद-सुभाषितावली पुस्तक की श्रेणियां हैं : Spirituality -Adhyatm

Name of the Book is : Yajurved Subhashitavali | This Book is written by Dr. Kapildev Dwivedi | To Read and Download More Books written by Dr. Kapildev Dwivedi in Hindi, Please Click : | The size of this book is 34.7 MB | This Book has 210 Pages | The Download link of the book "Yajurved Subhashitavali" is given above, you can downlaod Yajurved Subhashitavali from the above link for free | Yajurved Subhashitavali is posted under following categories Spirituality -Adhyatm |


पुस्तक के लेखक :
पुस्तक की श्रेणी :
पुस्तक का साइज : 34.7 MB
कुल पृष्ठ : 210

Search On Amazon यदि इस पेज में कोई त्रुटी हो तो कृपया नीचे कमेन्ट में सूचित करें |
पुस्तक का एक अंश नीचे दिया गया है : यह अंश मशीनी टाइपिंग है, इसमें त्रुटियाँ संभव हैं, इसे पुस्तक का हिस्सा न माना जाये |

यजुर्वेद का महत्त्व : वेद प्रभु की वाणी है। वेद ज्ञान के स्रोत हैं । वेदों में अनन्त ज्ञान भरा हुआ है । वे मानवमात्र के लिए प्रकाश-स्तम्भ हैं । यजुर्वेद ज्ञान-प्रधान वेद है । मानव-जीवन यज्ञमय है। परमात्मा की पूरी सृष्टि यज्ञमय है । अतएव ब्राह्मण-ग्रन्थों में परमात्मा और मनुष्य को यज्ञ कहा गया है । परमात्मा के द्वारा सृष्टि-रचना यज्ञ है। मनुष्य के जीवन का प्रत्येक कार्य यज्ञ का अंग है। 'इदं न मम' (यह मेरा नही है) की भावना यज्ञ का शुद्ध रूप है। जीवन सभी दृष्टि से उन्नत, परिष्कृत और परिपुष्ट हो यह यज्ञ का बास्तविक लक्ष्य है । अत एव यजुर्वेद में जीवन के सर्वागीण विकास की विधि प्रस्तुत की गई है ।

You might also like

Leave A Reply

Your email address will not be published.