अमर चूनड़ी | Amar Chunadi

अमर चूनड़ी | Amar Chunadi

अमर चूनड़ी | Amar Chunadi के बारे में अधिक जानकारी :

इस पुस्तक का नाम : अमर चूनड़ी है | इस पुस्तक के लेखक हैं : Nrasingh Rajpurohit | Nrasingh Rajpurohit की अन्य पुस्तकें पढने के लिए क्लिक करें : | इस पुस्तक का कुल साइज 2.3 MB है | पुस्तक में कुल 120 पृष्ठ हैं |नीचे अमर चूनड़ी का डाउनलोड लिंक दिया गया है जहाँ से आप इस पुस्तक को मुफ्त डाउनलोड कर सकते हैं | अमर चूनड़ी पुस्तक की श्रेणियां हैं : Knowledge, Stories, Novels & Plays

Name of the Book is : Amar Chunadi | This Book is written by Nrasingh Rajpurohit | To Read and Download More Books written by Nrasingh Rajpurohit in Hindi, Please Click : | The size of this book is 2.3 MB | This Book has 120 Pages | The Download link of the book "Amar Chunadi" is given above, you can downlaod Amar Chunadi from the above link for free | Amar Chunadi is posted under following categories Knowledge, Stories, Novels & Plays |


पुस्तक के लेखक :
पुस्तक की श्रेणी : ,
पुस्तक का साइज : 2.3 MB
कुल पृष्ठ : 120

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हाथों हाथ घर कीसफाई करने नौवड़ा री छिया में मचा मार्थ बैठ्यौ। तो मन जाणं कियाई हैग्यौ । पर रा पूणा-खूणा सू बाई रो याद जुड़ियोही ही। यू. लाग्यौ जाणे वा 'रसोड़ा में बैठी रसोई वाम री है अर अवार म्हून बुलाय लेा । जाणे वा ग्वाड़ी में बैठ गाय इह ' है अर अधार किरानू ने गिलास साबण रौ हाकी कर देला । जाणे हालिया में बैठी खरटी फेर री है अर अबार वीरौ गाव सकेर इँला । म्हनं वीरौ सुगण रौ अर बाई नै वीरौ गावण रौ कितौ कोई हो, निणरो कोई पार नी । म्हं आवतौ जितरी बोर लारं पड़ जाती-वाई एकर तौ वीरौ सुणाय दे! अर ची नौणी कळ सु सरू कर देवती । आज ई इण अळस दो पारे रो पोर में यू लाग्यौ जाणं वा साम्हा बैठी वीरी गाय

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