खुजराहो का खारा पानी | Khujraho Ka Khara Pani

खुजराहो का खारा पानी ( प्रेम कहानी संग्रह ) : विश्वमोहन | Khujraho Ka Khara Pani ( Hindi Love Stories Collection) : Vishwamohan

खुजराहो का खारा पानी ( प्रेम कहानी संग्रह ) : विश्वमोहन | Khujraho Ka Khara Pani ( Hindi Love Stories Collection) : Vishwamohan के बारे में अधिक जानकारी :

इस पुस्तक का नाम : खुजराहो का खारा पानी है | इस पुस्तक के लेखक हैं : Vishvamohan | Vishvamohan की अन्य पुस्तकें पढने के लिए क्लिक करें : | इस पुस्तक का कुल साइज 12 MB है | पुस्तक में कुल 112 पृष्ठ हैं |नीचे खुजराहो का खारा पानी का डाउनलोड लिंक दिया गया है जहाँ से आप इस पुस्तक को मुफ्त डाउनलोड कर सकते हैं | खुजराहो का खारा पानी पुस्तक की श्रेणियां हैं : Stories, Novels & Plays

Name of the Book is : Khujraho Ka Khara Pani | This Book is written by Vishvamohan | To Read and Download More Books written by Vishvamohan in Hindi, Please Click : | The size of this book is 12 MB | This Book has 112 Pages | The Download link of the book "Khujraho Ka Khara Pani" is given above, you can downlaod Khujraho Ka Khara Pani from the above link for free | Khujraho Ka Khara Pani is posted under following categories Stories, Novels & Plays |


पुस्तक के लेखक :
पुस्तक की श्रेणी :
पुस्तक का साइज : 12 MB
कुल पृष्ठ : 112

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पारस्परिक अंतः निर्भरता से संबंधों में कर्त्तव्य और प्रेम की भावना आती है और यहीं अड़े पालक पर विकसित होकर अहैतुक मानवीय करुणा का रूप लेकर संस्कृति, सभ्यता और विश्व-बंधुत्व की नींव रखती हैं। इस मानवीय परुणा के अभाव में यह सृष्टि बन ही नहीं सकती थी और इसके अभाव में बच भी नहीं सकेगी। संवेदनशील ति, विचारक और लेखक की यहीं सर्वप्रथम चिंता है।
नो' पर 'तंत्र की सत्ता लोलुपता ही हो गई हैं, अर्थव्यवस्था का लक्ष्य अधिकाधिक नाम अर्जन हो गया है. धर्म कथ्य का पर्याय न रहकर, राजनीति कर रहा है। मानव-संबंधों को प्रभावित करने वाले तीनों घटक-शासन तंत्र, अर्थव्यवस्था और धर्न नियि ही नहीं वित हो गए हैं। पारिवारिक संबंधों का आधार भी स्वार्थ सिद्धि हो गया है। यह दौर दिन-प्रतिदिन तुफानी होता जा रहा है। इस तृप्शन में भयभीत मानवीय संबंधों की चिंता और तजनित करुणा से ओतप्रोत है विश्व मोहन की प्रस्तुत महानियाँ। इससे पूर्व के तीन कथा संकलनों कीतरह 'जुराहो का धारा पानी में भी उनकी यहीं प्रतिवद्धता प्रकट हुई है। ये सहज भाव से अपनी बात कहते चलते हैं। इसलिए क-कहीं आनेवाला आधनिक भाषायी प्रभाव उसे एक भिन्न अदा प्रदान करता है और विश्वसनीयता भी। श्री विश्व मोहन तीन दशकों से लेखन के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अतः तीन दशक की सभी आशाएँ निराशा इनकी कहानियों में स्पष्ट झलकती हैं। विश्वास है, उनकी कहानियाँ लोक-मन को छुएंगी।

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