गल्प-कुसुमाकर | Galp-Kusumakar

गल्प-कुसुमाकर | Galp-Kusumakar

गल्प-कुसुमाकर | Galp-Kusumakar के बारे में अधिक जानकारी :

इस पुस्तक का नाम : गल्प-कुसुमाकर है | इस पुस्तक के लेखक हैं : Pupfa Bhikkhu | Pupfa Bhikkhu की अन्य पुस्तकें पढने के लिए क्लिक करें : | इस पुस्तक का कुल साइज 6 MB है | पुस्तक में कुल 219 पृष्ठ हैं |नीचे गल्प-कुसुमाकर का डाउनलोड लिंक दिया गया है जहाँ से आप इस पुस्तक को मुफ्त डाउनलोड कर सकते हैं | गल्प-कुसुमाकर पुस्तक की श्रेणियां हैं : Stories, Novels & Plays

Name of the Book is : Galp-Kusumakar | This Book is written by Pupfa Bhikkhu | To Read and Download More Books written by Pupfa Bhikkhu in Hindi, Please Click : | The size of this book is 6 MB | This Book has 219 Pages | The Download link of the book "Galp-Kusumakar " is given above, you can downlaod Galp-Kusumakar from the above link for free | Galp-Kusumakar is posted under following categories Stories, Novels & Plays |


पुस्तक के लेखक :
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पुस्तक का साइज : 6 MB
कुल पृष्ठ : 219

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हमारी कहानीका सम्वन्ध पुराने रूपवासकी उस मोडदार गलीसे है, जिसमे अबसे ४० वर्ष पहले ऊधव और माधव नामके दो छीपी भाई रहते थे। ये बड़े परिश्रमशील और कमाऊ थे। मगर ऊधव प्रकृति का क्रूर था, लेकर देना नहीं जानता था, वैर बदला लेनेमे कर्मठ और नृशस था। वह किसीको क्षमा करना नहीं जानता था। नौकरी न देना या कम देना नया नमूना वताकर पुराना या रद्दी माल गाहकके गले मढ़ देना तो कोई इससे ही सीख ले, 'ससार भरका घन मेरे घरमे आ जाय' यही इसकी इच्छा रहती थी।

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