गाँधी विचार दोहन | Gandhi Vichar Dohan

गाँधी विचार दोहन : किशोरलाल मश्रुवाला | Gandhi Vichar Dohan : Kishorlal Mashruwala

गाँधी विचार दोहन : किशोरलाल मश्रुवाला | Gandhi Vichar Dohan : Kishorlal Mashruwala के बारे में अधिक जानकारी :

इस पुस्तक का नाम : गाँधी विचार दोहन है | इस पुस्तक के लेखक हैं : | की अन्य पुस्तकें पढने के लिए क्लिक करें : | इस पुस्तक का कुल साइज 5.6 MB है | पुस्तक में कुल 228 पृष्ठ हैं |नीचे गाँधी विचार दोहन का डाउनलोड लिंक दिया गया है जहाँ से आप इस पुस्तक को मुफ्त डाउनलोड कर सकते हैं | गाँधी विचार दोहन पुस्तक की श्रेणियां हैं : history, india, inspirational

Name of the Book is : Gandhi Vichar Dohan | This Book is written by | To Read and Download More Books written by in Hindi, Please Click : | The size of this book is 5.6 MB | This Book has 228 Pages | The Download link of the book "Gandhi Vichar Dohan" is given above, you can downlaod Gandhi Vichar Dohan from the above link for free | Gandhi Vichar Dohan is posted under following categories history, india, inspirational |


पुस्तक की श्रेणी : , ,
पुस्तक का साइज : 5.6 MB
कुल पृष्ठ : 228

Search On Amazon यदि इस पेज में कोई त्रुटी हो तो कृपया नीचे कमेन्ट में सूचित करें |
पुस्तक का एक अंश नीचे दिया गया है : यह अंश मशीनी टाइपिंग है, इसमें त्रुटियाँ संभव हैं, इसे पुस्तक का हिस्सा न माना जाये |

गंभीरता के साथ अध्ययन और मनन करने का उन्हें पूरा अवसर मिला है । सत्याग्रहाश्रम साबरमती के एक प्रभावशाली शिक्षक और गुजरात राष्ट्रीय विद्यापीठ के यशस्वी महामात्र ( Registrar ) के रूप में वे महात्माजी के अत्यन्त निकटवर्ती सहयोगी रह चुके हैं और अब भी विलेपार्ले, (बम्बई के एक उपनगर) का गाँधी-विद्यालय उन्हीं के तत्वावधान में चल रहा है । * इस विद्यालय में ग्राम-शिक्षण की व्यवस्था की गई थी, जिसमें विद्यार्थियों को महात्माजी के सिद्धान्त और विचारों के परिचय कराने का भार श्री किशोरलाल भाई पर पड़ा । उसकी तैयारी में से ही इस पुस्तक की उत्पत्ति हुई है।
यों तो श्री किशोरलाल भाई खुद ही.महात्माजी के इतने प्रिय और निकटवर्ती स्वाध्यायी हैं कि उनके इस दोहन में सहसा भूल या विपर्यास होने की सम्भावना कम है; फिर भी उन्होंने श्री कोका साहब कालेलकर तथा श्री आनन्द स्वामी एवं अन्य गाँधीस्वाध्यार्थियों को यह दिखाली है और इसके प्रकाशन में उनका प्रोत्साहन भी कारणीभूत है।

You might also like

Leave A Reply

Your email address will not be published.