गौ रक्षा और हिन्दुस्तानी मुसलमान | Gau Raksha Aur Hindustani Musalman

गौ रक्षा और हिन्दुस्तानी मुसलमान : मौलाना अब्दुलकरीम पारेख | Gau Raksha Aur Hindustani Musalman : Maulana Abdulkareem Parekh

गौ रक्षा और हिन्दुस्तानी मुसलमान : मौलाना अब्दुलकरीम पारेख | Gau Raksha Aur Hindustani Musalman : Maulana Abdulkareem Parekh के बारे में अधिक जानकारी :

इस पुस्तक का नाम : गौ रक्षा और हिन्दुस्तानी मुसलमान है | इस पुस्तक के लेखक हैं : Maulana Abdulkareem Parekh | Maulana Abdulkareem Parekh की अन्य पुस्तकें पढने के लिए क्लिक करें : | इस पुस्तक का कुल साइज 10.2 MB है | पुस्तक में कुल 21 पृष्ठ हैं |नीचे गौ रक्षा और हिन्दुस्तानी मुसलमान का डाउनलोड लिंक दिया गया है जहाँ से आप इस पुस्तक को मुफ्त डाउनलोड कर सकते हैं | गौ रक्षा और हिन्दुस्तानी मुसलमान पुस्तक की श्रेणियां हैं : dharm, hindu, history, india, islam, others

Name of the Book is : Gau Raksha Aur Hindustani Musalman | This Book is written by Maulana Abdulkareem Parekh | To Read and Download More Books written by Maulana Abdulkareem Parekh in Hindi, Please Click : | The size of this book is 10.2 MB | This Book has 21 Pages | The Download link of the book "Gau Raksha Aur Hindustani Musalman" is given above, you can downlaod Gau Raksha Aur Hindustani Musalman from the above link for free | Gau Raksha Aur Hindustani Musalman is posted under following categories dharm, hindu, history, india, islam, others |


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पुस्तक का साइज : 10.2 MB
कुल पृष्ठ : 21

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मांस व चमड़े के व्यापारी
हमारे इस मुल्क में और भुत्व के बाहर की मंडियों में लियों को व्यापार और खास तौर से जिस किये हुए जानवरों के चमड़े बहु कभी माने जाते हैं। इस के कारखाने, जूते की फयियी, जिस में कई लाख लोग काम करते हैं, जूते-चप्पल के उद्योग, वाता' कम्पनी का देशव्यापी उद्योग तथा चमड़े की पेटिया, बक्से, फल कमर पट्टे (बेल्ट), बटूर्व और पाकिट, इन सभी चीजों के कारखाने चलाने वाले सारे के सारे मुसलमान नहीं है, बल्कि अधीकांश गैर मुस्लिम ही हैं। बड़े बड़े होटल जिन के लाने में शायद सरकार भी भागीदार है, वहीं बड़े पैमाने पर गाय का गोश्त पका कर बेथा और खिलाया जाता है। क्या यह सभी मुसलमान हैं ? थाई जहाज़ के सफर में हवाई कम्पनियां यात्रीयों को गाय का गोश्त खिलाती हैं, मुल्क के अंदर वान भरती हैं, तब भी और बादलों के बहुत ऊपर भी दिमा परिचारिकाएं (एयर होस्टेस हिन्दुस्तानी और विदेशी मुसाफिरों को बड़े आदर से गाय का गोश्त दिलाती हैं और यह सभी लड़कियों मुस्लिम नहीं होती। यह भी बताया जाता है कि गाय का गोश्त भारत में एक्सपोर्ट' होकर दूसरे मुल्कों में भेजा जाता है और मेरी जानकारी के अनुसार इस वारोबार में हिन्दु

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