हिंदी काव्य (धारा) | Hindi Kavya (Dhara)

हिंदी काव्य (धारा) | Hindi Kavya (Dhara)

हिंदी काव्य (धारा) | Hindi Kavya (Dhara) के बारे में अधिक जानकारी :

इस पुस्तक का नाम : हिंदी काव्य (धारा) है | इस पुस्तक के लेखक हैं : Rahul Sankrityayan | Rahul Sankrityayan की अन्य पुस्तकें पढने के लिए क्लिक करें : | इस पुस्तक का कुल साइज 39.0 MB है | पुस्तक में कुल 567 पृष्ठ हैं |नीचे हिंदी काव्य (धारा) का डाउनलोड लिंक दिया गया है जहाँ से आप इस पुस्तक को मुफ्त डाउनलोड कर सकते हैं | हिंदी काव्य (धारा) पुस्तक की श्रेणियां हैं : Knowledge, Stories, Novels & Plays

Name of the Book is : Hindi Kavya (Dhara) | This Book is written by Rahul Sankrityayan | To Read and Download More Books written by Rahul Sankrityayan in Hindi, Please Click : | The size of this book is 39.0 MB | This Book has 567 Pages | The Download link of the book "Hindi Kavya (Dhara) " is given above, you can downlaod Hindi Kavya (Dhara) from the above link for free | Hindi Kavya (Dhara) is posted under following categories Knowledge, Stories, Novels & Plays |


पुस्तक के लेखक :
पुस्तक की श्रेणी : ,
पुस्तक का साइज : 39.0 MB
कुल पृष्ठ : 567

Search On Amazon यदि इस पेज में कोई त्रुटी हो तो कृपया नीचे कमेन्ट में सूचित करें |
पुस्तक का एक अंश नीचे दिया गया है : यह अंश मशीनी टाइपिंग है, इसमें त्रुटियाँ संभव हैं, इसे पुस्तक का हिस्सा न माना जाये |

इस प्रकार हिमालयसे गोदावरी और सिंधसे ब्रह्मपुत्र तकने इस साहित्यके निर्माणमें हाथ बँटाया है। यह भाषा संस्कृतकी तरह ही मृतभाषा नहीं थी,यह हम कह आये हैं। साहित्यकी भाषा भी कोई मूल बोलचालवाली भाषा होनी चाहिए, और वह भाषा जरूर एक परिमित क्षेत्रकी मातृभाषा हो सकती है। स्वयंभूफी भाषाकी क्रियाओं और कितने ही जीके शब्दोंको देखने से वह अवधीके सबसे नजदीक मालूम होती है । यद्यपि ऐसा कहनेसे बहुत दिनों से चली आई इस धारणाके हम खिलाफ जा रहे हैं, कि अपभ्रंश साहित्य सौरसेनी और महाराष्ट्री अपभ्रंशों हीमें लिखा गया। लेकिन, जो सामग्री हमारे सामने मौजूद है, वह हमें वही कहने के लिए मजबूर करती है । हाँ, इसका यह मतलब नहीं कि और भाषाओंके विशेष शब्द उसमें नहीं हैं।

You might also like

Leave A Reply

Your email address will not be published.