जय जय प्रियतम | Jai Jai Pritam

जय जय प्रियतम : श्री राधाबाबा | Jai Jai Pritam : Shree Radha Baba

जय जय प्रियतम : श्री राधाबाबा | Jai Jai Pritam : Shree Radha Baba के बारे में अधिक जानकारी :

इस पुस्तक का नाम : जय जय प्रियतम है | इस पुस्तक के लेखक हैं : Shree Radha Baba | Shree Radha Baba की अन्य पुस्तकें पढने के लिए क्लिक करें : | इस पुस्तक का कुल साइज 15.9 MB है | पुस्तक में कुल 205 पृष्ठ हैं |नीचे जय जय प्रियतम का डाउनलोड लिंक दिया गया है जहाँ से आप इस पुस्तक को मुफ्त डाउनलोड कर सकते हैं | जय जय प्रियतम पुस्तक की श्रेणियां हैं : dharm, hindu

Name of the Book is : Jai Jai Pritam | This Book is written by Shree Radha Baba | To Read and Download More Books written by Shree Radha Baba in Hindi, Please Click : | The size of this book is 15.9 MB | This Book has 205 Pages | The Download link of the book "Jai Jai Pritam" is given above, you can downlaod Jai Jai Pritam from the above link for free | Jai Jai Pritam is posted under following categories dharm, hindu |


पुस्तक के लेखक :
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पुस्तक का साइज : 15.9 MB
कुल पृष्ठ : 205

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३ महीपत-हिनी ॥ ॐ रम सुनते ही, प्रियतम! वन्दन कुलदेवीका करके उठ पई शीघतासे, प्रियतम! निर्गछन सलका , मि इनक्ने प्रबुद्ध करके, प्रियतम! नहलाकर अतुल वेषभूषा सुन्दर उनकी रच दौ, प्रियतम ||५९५।।
आ पहुँची सब सहेलियाँ भी वैसी ही सनी भी, प्रियतम! प्राचीमें दीखा-सा है या, ज्योतिर्मय रष रविका, प्रगतम! मन्दिरमें वृद्ध पितामश्के एकत्र हुई सय वे, प्रियतम! आशीष ताहितीको उनकी तेनी आवश्यक भी, प्रियतम ।।५९६॥
केनौं इन अहे! पोतिपर, जो बड़ी समने थी, प्रयतम! दादाकी दृष्टि गर्मी, बै तो उड़ पई अपीर हुए, प्रियतम! या यही प्रथम अवसर उनके जीवना, जो उनमें, प्रियतम! हो गया देखते ही उनके आवेश मोइका-सः, प्रियतम ।।५१७।।

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