कहो व्यास, कैसी कटी | Kaho Vyas, Kaisi Kati

कहो व्यास, कैसी कटी | Kaho Vyas, Kaisi Kati

कहो व्यास, कैसी कटी | Kaho Vyas, Kaisi Kati के बारे में अधिक जानकारी :

इस पुस्तक का नाम : कहो व्यास, कैसी कटी है | इस पुस्तक के लेखक हैं : Gopal Prasad Vyas | Gopal Prasad Vyas की अन्य पुस्तकें पढने के लिए क्लिक करें : | इस पुस्तक का कुल साइज 46 MB है | पुस्तक में कुल 697 पृष्ठ हैं |नीचे कहो व्यास, कैसी कटी का डाउनलोड लिंक दिया गया है जहाँ से आप इस पुस्तक को मुफ्त डाउनलोड कर सकते हैं | कहो व्यास, कैसी कटी पुस्तक की श्रेणियां हैं : literature, Poetry

Name of the Book is : Kaho Vyas, Kaisi Kati | This Book is written by Gopal Prasad Vyas | To Read and Download More Books written by Gopal Prasad Vyas in Hindi, Please Click : | The size of this book is 46 MB | This Book has 697 Pages | The Download link of the book "Kaho Vyas, Kaisi Kati " is given above, you can downlaod Kaho Vyas, Kaisi Kati from the above link for free | Kaho Vyas, Kaisi Kati is posted under following categories literature, Poetry |


पुस्तक के लेखक :
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पुस्तक का साइज : 46 MB
कुल पृष्ठ : 697

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यह पुस्तक भी मैंने प्रशंसा प्राप्त करने के लिए लिखी है। अब उतरती उम्र में और कर भी क्या सकता हूं? चाहता हूं कि लोग आएं, कहें और लिखें मेरे संबंध में अपने प्रशंसनीय उद्गार । परंतु विडंबना देखिए कि मेरे जीते-जी लोगों ने मेरी प्रशंसा करना बंद कर दिया है। मेरे रहते ही मुझे भूले जा रहे हैं । तब मैं कालजयी कैसे बनूगा ? मैंने तो समझा था कि मैं अमरता का वरदान लेकर अवतरित हुआ। हैं। लेकिन ये क्या हो रहा है ? उठाओ कलम ! बताओ दुनिया को कि मैं क्या हूं ? भाई, मेरे रहते ही मुझको समझ लो न ! बाद में पछताओगे और लोगों से पूछते फिरोगे ।

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