कश्मीरी रामवतारचरित | kashmiri Ramavtaracharit

कश्मीरी रामवतारचरित | kashmiri Ramavtaracharit

कश्मीरी रामवतारचरित | kashmiri Ramavtaracharit के बारे में अधिक जानकारी :

इस पुस्तक का नाम : कश्मीरी रामवतारचरित है | इस पुस्तक के लेखक हैं : Shri Prakash Ram Kuryagrami | Shri Prakash Ram Kuryagrami की अन्य पुस्तकें पढने के लिए क्लिक करें : | इस पुस्तक का कुल साइज 93.1 MB है | पुस्तक में कुल 484 पृष्ठ हैं |नीचे कश्मीरी रामवतारचरित का डाउनलोड लिंक दिया गया है जहाँ से आप इस पुस्तक को मुफ्त डाउनलोड कर सकते हैं | कश्मीरी रामवतारचरित पुस्तक की श्रेणियां हैं : dharm

Name of the Book is : kashmiri Ramavtaracharit | This Book is written by Shri Prakash Ram Kuryagrami | To Read and Download More Books written by Shri Prakash Ram Kuryagrami in Hindi, Please Click : | The size of this book is 93.1 MB | This Book has 484 Pages | The Download link of the book "kashmiri Ramavtaracharit" is given above, you can downlaod kashmiri Ramavtaracharit from the above link for free | kashmiri Ramavtaracharit is posted under following categories dharm |


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पुस्तक का साइज : 93.1 MB
कुल पृष्ठ : 484

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एक बात पर दृष्टि जाती है कि इन ग्रन्थों में रामायण, महाभारत, इस्लामी हदीस, श्रीजपुजी, गुरुग्रंथ साहब को ही शुरू में क्यों लिया गया है यह मात्र इसलिए कि इनके कथानक से सारा देश परिचित है। वह जाना-समझा कथानक, अपरिचित भाषा के मूलपाठ को नागरी अक्षरों में पाकर, पाठक को समझने में सरलता होगी। यदि आरम्भ में उपन्यास, निबन्ध आदि का लिप्यन्तरण पढ़ा जायगा, तो कथा-वस्तु से अंपरिचय, उसको समझने में बाधक सिद्ध होगा। एक भाषाभाषी दूसरी भाषा के ग्रन्थ को, कथानक सुपरिचित होने पर, अधिक सरलता से समझ सकेगा। इस प्रकार नागरी कलेवर में पाकर, उनका सीख लेना अधिक सुकर होगा।

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