क्रिया – कोश | Kriya – Kosh

क्रिया – कोश | Kriya – Kosh

क्रिया – कोश | Kriya – Kosh के बारे में अधिक जानकारी :

इस पुस्तक का नाम : क्रिया – कोश है | इस पुस्तक के लेखक हैं : Acharya Shri Tulsi | Acharya Shri Tulsi की अन्य पुस्तकें पढने के लिए क्लिक करें : | इस पुस्तक का कुल साइज 17.27 MB है | पुस्तक में कुल 436 पृष्ठ हैं |नीचे क्रिया – कोश का डाउनलोड लिंक दिया गया है जहाँ से आप इस पुस्तक को मुफ्त डाउनलोड कर सकते हैं | क्रिया – कोश पुस्तक की श्रेणियां हैं : Spirituality -Adhyatm

Name of the Book is : Kriya – Kosh | This Book is written by Acharya Shri Tulsi | To Read and Download More Books written by Acharya Shri Tulsi in Hindi, Please Click : | The size of this book is 17.27 MB | This Book has 436 Pages | The Download link of the book "Kriya – Kosh " is given above, you can downlaod Kriya – Kosh from the above link for free | Kriya – Kosh is posted under following categories Spirituality -Adhyatm |


पुस्तक के लेखक :
पुस्तक की श्रेणी :
पुस्तक का साइज : 17.27 MB
कुल पृष्ठ : 436

Search On Amazon यदि इस पेज में कोई त्रुटी हो तो कृपया नीचे कमेन्ट में सूचित करें |
पुस्तक का एक अंश नीचे दिया गया है : यह अंश मशीनी टाइपिंग है, इसमें त्रुटियाँ संभव हैं, इसे पुस्तक का हिस्सा न माना जाये |

जैन दर्शन सूक्ष्म और गहन है तथा मूल सिद्धांत ग्रंथों में इसका क्रमवद्ध तथा विषयांनुक्रम विवेचन नहीं होने के कारण इसके अध्ययन में तथा इसके समझने में कठिनाई होती है । अनेक विषयों के विवेचन अपूर्ण-अधूरे हैं, अतः अनेक स्थल इस कारण से भी समझ में नहीं आते हैं। अर्थवोध की इस दुर्गमता के कारण जैन-अजैन दोनों प्रकार के विद्वान जैन दर्शन के अध्ययन से सकुचाते है । क्रमबद्ध तथा विषयानुक्रम 'विवेचन का अभाव जैन दर्शन के अध्ययन में सबसे बड़ी बाधा उपस्थित करता है—ऐसा हमारा अनुभव है । अध्ययन की बाधा मिटाने के लिए हमने जैन विषय-कोश की एक परिकल्पना बनायी और उस परिकल्पना के अनुसार समग्र आगम ग्रंथों का अध्ययन किया और उस अध्ययन के आधार पर सर्व प्रथम हमने विशिष्ट पारिभाषिक, दार्शनिक तथा आध्यात्मिक विषयों की एक सूची बनाई । विषयों की संख्या १००० से भी अधिक हो गई तथा इन विषयों का सम्यक् वर्गीकरण करने के लिए हमने आधुनिक सार्वभौमिक दशमलव वर्गीकरण का अध्ययन किया। तत्पश्चात् बहुत कुछ इसी पद्धति का अनुसरण करते हुए हमने सम्पूर्ण वाङ्मय को १०० वर्गों में विभक्त करके मूल विषयों के वर्गीकरण की एक रूपरेखा ( देखें पृ० १३ ) तैयार की। यह रूपरेखा कोई अन्तिम नहीं है । परिवर्तन, परिवर्द्धन तथा संशोधन की अपेक्षा भी इसमें रह सकती है । मूल विषयों से भी अनेक उपविषयों की सूची भी हमने तैयार की है। उनमें से जीव-परिणाम ( मूल विषयांक ०४) की उपविषय सूची लेश्याकोश में दी गई है ।

You might also like

Leave A Reply

Your email address will not be published.