कूर्मपुराण : गीता प्रेस की हिंदी पुस्तक मुफ्त डाउनलोड | Kurma Puraan By Geeta Press Hindi Book Free Download

कूर्मपुराण : गीता प्रेस की हिंदी पुस्तक मुफ्त डाउनलोड | Kurma Puraan By Geeta Press Hindi Book Free Download

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इस पुस्तक का नाम : है | इस पुस्तक के लेखक हैं : | की अन्य पुस्तकें पढने के लिए क्लिक करें : | इस पुस्तक का कुल साइज 37.22 MB है | पुस्तक में कुल 501 पृष्ठ हैं |नीचे का डाउनलोड लिंक दिया गया है जहाँ से आप इस पुस्तक को मुफ्त डाउनलोड कर सकते हैं | पुस्तक की श्रेणियां हैं : dharm, gita-press, hindu

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पुस्तक का साइज : 37.22 MB
कुल पृष्ठ : 501

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[८1 हमला _ _ कं _ ऊननन ४८-पुष्करद्वीपकी स्थिति तथा विस्तारका वर्णन संश्षेपमें अव्यक्तसे सुष्टिका प्रतिपादन ४९-स्वारोचिपसे वैवस्वत मन्वन्तरतकके देवता सतर्षि इन्द्र आदिका वर्णन नारायणद्वारा ही विभिन्‍न मन्वन्तरोंमें सृष्टि आदिका प्रतिपादन भगवान्‌ विष्णुकी चार मूर्तियोंका विवेचन विष्णुका माहात्म्स ५०-अद्वाइस व्यासोंका वर्णन कृष्णाद्वै पायन-द्वारा र्श५ अद्वाईसवें बेदसंहिताका विभाजन तथा पुराणेतिहासकी रचना वेदकी विण्णुके शाखाओंका विस्तार तथा माहात्प्यका कथन ५१-कलियुगमें महादेवके अवतारों तथा उनके शिष्योंका वर्णन भविष्यमें होनेवाले सात मन्वन्तरोंका नाम-परिगणन कूर्मपुराणके पूर्वविभागका उपसंहार उपरिविभाग १- ईश्वर शिव तथा क्रषियोंके संवादमें ईश्वरगीताका उपक्रम २- आत्मतत्त्वके स्वरूपका निरूपण सांख्य एवं योगके ज्ञानका अभेद आत्मसाक्षात्कारके साधनोंका वर्णन ३-अव्यक्त शिवतत्त्वसे सृष्टिका कथन परमात्माके स्वरूपका वर्णन तथा प्रधान पुरुष एवं महदादि तत््वॉँसे सृष्टिका क्रम-वर्णन शिवस्वरूपका निरूपण ४- शिव- भक्तिका माहात्म्य शिवोपासनाकी सुगमता ज्ञानरूप शिवस्वरूपका वर्णन शिवकी तीन प्रकारकी शक्तियोंका प्रतिपादन शिवके परम तत्त्वका निरूपण ५-ऋषियॉंको दिव्य नृत्य करते हुए भगवान्‌ शंकरका आकाशमें दर्शन मुनियॉद्वारा महेश्वरकी भावपूर्ण स्तुति करना २६० ६- ईश्वर शंकर -द्वारा ऋषिगणोंकों अपना सर्वव्यापी स्वरूप बतलाना तथा अपनी र्५५ िध्याय विषय पृष्ठ-संख्या भगवत्ताका और इस ज्ञानसे मुक्तिकी प्राप्तिका निरूपण करना ७-ईश्वर शंकर -द्वारा अपनी विभूतियोंका वर्णन तथा प्रकृति महत्‌ आदि चौबीस तत्वों तीन गुणों एवं पशु पाश और पशुपति आदिका विवेचन ८-महेश्वरका अद्वितीय परमेश्वरके रूपमें निरूपण सांख्य-सिद्धान्तसें तत्त्वॉका सृष्टिक्रिम महेश्वरके छः अब महेश्वरके स्वरूपके ज्ञानसे परमपदकी प्राप्त ९- महादेवके विश्वरूपत्वका वर्णन तथा ईश्वर- सम्बन्धी ज्ञानका प्रतिपादन १०- ईश्वरद्वारा परम तत्त्व तथा परम ज्ञानके स्वरूपका निरूपण और उसकी प्रा्तिके साधनका वर्णन ११-योगकी महिमा अष्टाड्रयोग यम नियम आदि योगसाधनोंका लक्षण प्राणायामका विशेष प्रतिपादन ध्यानके विविध प्रकार पाशुपत-योगका वर्णन वाराणसीमें प्राण- त्यागकी महिमा शिव-आराधनकी विधि शिव और विष्णुके अभेदका प्रतिपादन शिवज्ञान-योगकी परम्पराका वर्णन ईश्वर- गीताकी फलश्रुति तथा उपसंहार १२-ब्रह्मचारीका धर्म यज्ञोपवीत आदिके सम्बन्धमें विविध विवरण अभिवादनकी विधि माता- पिता एवं गुरुकी महिमा ब्रह्मचारीके सदाचारका वर्णन १३-ब्रह्लचारीके नित्यकर्मकी विधि आचमनका विधान हाथोंमें स्थित तीर्थ उच्छिप्ट होनेपर शुद्धिकी प्रक्रिया मूत्र-पुरीपोत्सर्गके नियम १४-ब्रह्मचारीके आचारका वर्णन गुरुसे अध्ययन आदिकों विधि ब्रह्मचारीका धर्म गुरु तथा गुरु-पत्नीके साथ व्यवहारका वर्णन वेदाध्ययन और गायत्रीकी महिमा अनध्यायोंका वर्णन रद २७० रण श्८्८ र९४

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