ललितपुर जनपद के सेवा केन्द्रों का विश्लेषणात्मक अध्ययन | Lalitpur janpad Ke Sevakendron Ka Vishleshnatmak Adhyayan

ललितपुर जनपद के सेवा केन्द्रों का विश्लेषणात्मक अध्ययन | Lalitpur janpad Ke Sevakendron Ka Vishleshnatmak Adhyayan

ललितपुर जनपद के सेवा केन्द्रों का विश्लेषणात्मक अध्ययन | Lalitpur janpad Ke Sevakendron Ka Vishleshnatmak Adhyayan के बारे में अधिक जानकारी :

इस पुस्तक का नाम : ललितपुर जनपद के सेवा केन्द्रों का विश्लेषणात्मक अध्ययन है | इस पुस्तक के लेखक हैं : Arun Kumar Gupt | Arun Kumar Gupt की अन्य पुस्तकें पढने के लिए क्लिक करें : | इस पुस्तक का कुल साइज 84.6 MB है | पुस्तक में कुल 309 पृष्ठ हैं |नीचे ललितपुर जनपद के सेवा केन्द्रों का विश्लेषणात्मक अध्ययन का डाउनलोड लिंक दिया गया है जहाँ से आप इस पुस्तक को मुफ्त डाउनलोड कर सकते हैं | ललितपुर जनपद के सेवा केन्द्रों का विश्लेषणात्मक अध्ययन पुस्तक की श्रेणियां हैं : society

Name of the Book is : Lalitpur janpad Ke Sevakendron Ka Vishleshnatmak Adhyayan | This Book is written by Arun Kumar Gupt | To Read and Download More Books written by Arun Kumar Gupt in Hindi, Please Click : | The size of this book is 84.6 MB | This Book has 309 Pages | The Download link of the book "Lalitpur janpad Ke Sevakendron Ka Vishleshnatmak Adhyayan" is given above, you can downlaod Lalitpur janpad Ke Sevakendron Ka Vishleshnatmak Adhyayan from the above link for free | Lalitpur janpad Ke Sevakendron Ka Vishleshnatmak Adhyayan is posted under following categories society |


पुस्तक के लेखक :
पुस्तक की श्रेणी :
पुस्तक का साइज : 84.6 MB
कुल पृष्ठ : 309

Search On Amazon यदि इस पेज में कोई त्रुटी हो तो कृपया नीचे कमेन्ट में सूचित करें |
पुस्तक का एक अंश नीचे दिया गया है : यह अंश मशीनी टाइपिंग है, इसमें त्रुटियाँ संभव हैं, इसे पुस्तक का हिस्सा न माना जाये |

सामान्यतः देश तथा मुख्यतः अविकसित प्रदेशों में व्याप्त प्रादेशिक विषमता के निवारणार्थ शासन द्वारा विभिन्न प्रकार की विकासात्मक नीतियों को समय समय पर प्रस्तावित किया जा रहा है फिर भी नगरों एवं गांवों के मध्य तथा धनी एवं निर्धनों के मध्य प्रगति नहीं हो पायी है । वर्तमान समय तक समाज के कमजोर वर्गों को इन उपागमों से कोई लाभप्रद स्थान नहीं मिल सकता है । सामाजिक-आर्थिक बदलाव की प्रक्रिया इतनी सुस्त है कि स्वतन्त्रता प्राप्ति के 45 वर्ष बीत जाने के बाद ग्राम्यांचलों में निर्धनता, बेरोजगारी, अशिक्षा, सामाजिक एवं आर्थिक विषमता जैसी अनेक समस्यायें वर्तमान में हैं। इतना ही नहीं गांवों में भूमिहीन मजदूरों, सीमान्त कृषक शिक्षित एवं अशिक्षित लोगों का स्थानान्तरण तीव्रगति से हुआ ।

You might also like

Leave A Reply

Your email address will not be published.