लेन देन | Len Den

लेन देन : शरतचंद्र चट्टोपाध्याय | Len Den : Sharat Chandra Chattopadhyay

लेन देन : शरतचंद्र चट्टोपाध्याय | Len Den : Sharat Chandra Chattopadhyay के बारे में अधिक जानकारी :

इस पुस्तक का नाम : लेन देन है | इस पुस्तक के लेखक हैं : sharatchandra chattopadhyay | sharatchandra chattopadhyay की अन्य पुस्तकें पढने के लिए क्लिक करें : | इस पुस्तक का कुल साइज 12.3 MB है | पुस्तक में कुल 369 पृष्ठ हैं |नीचे लेन देन का डाउनलोड लिंक दिया गया है जहाँ से आप इस पुस्तक को मुफ्त डाउनलोड कर सकते हैं | लेन देन पुस्तक की श्रेणियां हैं : Stories, Novels & Plays

Name of the Book is : Len Den | This Book is written by sharatchandra chattopadhyay | To Read and Download More Books written by sharatchandra chattopadhyay in Hindi, Please Click : | The size of this book is 12.3 MB | This Book has 369 Pages | The Download link of the book "Len Den" is given above, you can downlaod Len Den from the above link for free | Len Den is posted under following categories Stories, Novels & Plays |


पुस्तक के लेखक :
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पुस्तक का साइज : 12.3 MB
कुल पृष्ठ : 369

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लेन-देन
| चण्डीगढ़ की चण्डी माता बहुत प्राचीन देवी हैं। कहते हैं कि राजा वीरबाहु के किसी पूर्वज ने एक लड़ाई जीतने पर, स्मारक रूप से, बारुई नदो के तट पर यह मन्दिर बनवाया था। इसके बाद, इसी मन्दिर के सहारे, धीरे-धीरे यह चण्डीगढ़ गाँव बस गया। शायद किसी ज़माने में सारा चण्डीगढ़ गाँव वास्तव में देवेत्तर-सम्पत्ति रहा हो; परन्तु अब तो मन्दिर के आस-पास की थोड़ी सी जमीन को छोड़कर बाकी सब अंश लोगों ने छीन लिया है। यह माम अव बीजगाँव की जुर्मीदारी में है । साधारण पाठकों को यह जानने की आवश्यकता नहीं कि अनाथ गरीबों का धन और मूक देवता की सम्पत्ति किस प्रकार अज्ञेय रहस्यमय उपाय से अन्त में जमींदार के पेट में आकर समाती है। मेरा कहना इतना है कि चण्डीगढ़ का अधिकांश अव चण्डी माता के हाथ से निकल गया है। देव का शायद इससे कुछ हानि-लाभ नहीं, परन्तु जो लोग जनके सेवक हैं, उनके हृदय से यह चोभ माज तक नहीं मिटा ।

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