लोग चाहे करें तुच्छज्ञान मगर हैं हराम | Log Chahe Karein Tuchchhgyan Magar hain Haraam

लोग चाहे करें तुच्छज्ञान मगर हैं हराम : शेख मुहम्मद सालेह | Log Chahe Karein Tuchchhgyan Magar hain Haraam : Shekh Mohammad Saleh

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इस पुस्तक का नाम : लोग चाहे करें तुच्छज्ञान मगर हैं हराम है | इस पुस्तक के लेखक हैं : Shekh Mohammad Saleh | Shekh Mohammad Saleh की अन्य पुस्तकें पढने के लिए क्लिक करें : | इस पुस्तक का कुल साइज 1.6 MB है | पुस्तक में कुल 157 पृष्ठ हैं |नीचे लोग चाहे करें तुच्छज्ञान मगर हैं हराम का डाउनलोड लिंक दिया गया है जहाँ से आप इस पुस्तक को मुफ्त डाउनलोड कर सकते हैं | लोग चाहे करें तुच्छज्ञान मगर हैं हराम पुस्तक की श्रेणियां हैं : islam, Uncategorized

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पुस्तक का साइज : 1.6 MB
कुल पृष्ठ : 157

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भूमिका | प्रशंसा केवल अल्लाह के लिए है। हम उसकी तअरीफ़ करते हैं, उससे मदद तलब करते हैं, उससे माफी चाहते हैं और अपने नफ्सों (आत्माओं) की बुराईयों से तथा अपने करतूतों के अनिष्टों से उसकी पनाह माँगते हैं। अल्लाह जिसे हिदायत दे उसे कोई गुमराह करने वाला नहीं और वह जिसे । गुमराह करे उसे कोई हिदायत देने वाला नहीं। मैं गवाही देता। हूँ कि अल्लाह के सिवा कोई सच्चा माबूद नहीं, वह अकेला है, उसका कोई साझी नहीं। और गवाही देता हूँ कि मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) उसके बंदे तथा रसूल हैं। अम्मा बाद (तत्पश्चात): ।
| अल्लाह तआला ने जिन चीजों को फर्ज किया है। उनको बर्बाद करना जायज़ नहीं है, जो सीमाएं निर्धारण (हदें मुकर्रर) कर दी है उनका उल्लंघन (तजाउज़ करना हराम है, | और जिन चीजों को हराम किया है उनमें पतित होना नाजायज़ है। नबी ॐ ने फ़रमायाः
ما أحل الله في كتابه فهو حلال، وما م قو حرام، وما سگ عنه فهو عافية فاقبلوا من الله العافية، قين الله، لم يكن تيا، ثم تلا هذه الآية: (وما كان رئة
[11:-२०००-1-jrve/Y:51:15.1.[11 :-)-1.4

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