निर्मला मुंशी प्रेमचंद हिंदी उपन्यास | Nirmala Munsi Premchand Novel in Hindi

निर्मला मुंशी प्रेमचंद हिंदी उपन्यास | Nirmala Munsi Premchand Novel in Hindi

निर्मला मुंशी प्रेमचंद हिंदी उपन्यास | Nirmala Munsi Premchand Novel in Hindi के बारे में अधिक जानकारी :

इस पुस्तक का नाम : निर्मला मुंशी प्रेमचंद हिंदी उपन्यास है | इस पुस्तक के लेखक हैं : Unknown | Unknown की अन्य पुस्तकें पढने के लिए क्लिक करें : | इस पुस्तक का कुल साइज 500 KB है | पुस्तक में कुल 48 पृष्ठ हैं |नीचे निर्मला मुंशी प्रेमचंद हिंदी उपन्यास का डाउनलोड लिंक दिया गया है जहाँ से आप इस पुस्तक को मुफ्त डाउनलोड कर सकते हैं | निर्मला मुंशी प्रेमचंद हिंदी उपन्यास पुस्तक की श्रेणियां हैं : Stories, Novels & Plays

Name of the Book is : Nirmala Munsi Premchand Novel in Hindi | This Book is written by Unknown | To Read and Download More Books written by Unknown in Hindi, Please Click : | The size of this book is 500 KB | This Book has 48 Pages | The Download link of the book "Nirmala Munsi Premchand Novel in Hindi" is given above, you can downlaod Nirmala Munsi Premchand Novel in Hindi from the above link for free | Nirmala Munsi Premchand Novel in Hindi is posted under following categories Stories, Novels & Plays |


पुस्तक के लेखक :
पुस्तक की श्रेणी :
पुस्तक का साइज : 500 KB
कुल पृष्ठ : 48

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यों तो बाबू उदयभानुलाल के परिवार में बीसों ही प्राणी थे, कोई ममेरा भाई था, कोई फुफेरा, कोई भांजा था, कोई भतीजा, लेकिन यहां हमें उनसे कोई प्रयोजन नहीं, वह अच्छे वकील थे, लक्ष्मी प्रसन्न थीं और कुटुम्ब के दरिद्र प्राणियों को आश्रय देना उनका कत्तव्य ही था। हमारा सम्बन्ध तो केवल उनकी दोनों कन्याओं से है, जिनमें बड़ी का नाम निर्मला और छोटी का कृष्णा था। अभी कल दोनों साथ-साथ गड़िया खेलती थीं। निर्मला का पन्द्रहवां साल था, कृष्णा का दसवां, फिर भी उनके स्वभाव में कोई विशेष अन्तर न था। दोनों चंचल, खिलाड़िन और सैर-तमाशे पर जान देती थी। दोनों गुड़िया का धूमधाम से ब्याह करती थीं, सदा काम से जी चुराती थीं।

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