अरी मैं तो नामके | Ari Main To Naamke

अरी मैं तो नामके : ओशो | Ari Main To Naamke : Osho

अरी मैं तो नामके : ओशो | Ari Main To Naamke : Osho के बारे में अधिक जानकारी :

इस पुस्तक का नाम : अरी मैं तो नामके है | इस पुस्तक के लेखक हैं : osho | osho की अन्य पुस्तकें पढने के लिए क्लिक करें : | इस पुस्तक का कुल साइज 1.84 MB है | पुस्तक में कुल 321 पृष्ठ हैं |नीचे अरी मैं तो नामके का डाउनलोड लिंक दिया गया है जहाँ से आप इस पुस्तक को मुफ्त डाउनलोड कर सकते हैं | अरी मैं तो नामके पुस्तक की श्रेणियां हैं : dharm, Spirituality -Adhyatm

Name of the Book is : Ari Main To Naamke | This Book is written by osho | To Read and Download More Books written by osho in Hindi, Please Click : | The size of this book is 1.84 MB | This Book has 321 Pages | The Download link of the book "Ari Main To Naamke" is given above, you can downlaod Ari Main To Naamke from the above link for free | Ari Main To Naamke is posted under following categories dharm, Spirituality -Adhyatm |


पुस्तक के लेखक :
पुस्तक की श्रेणी : ,
पुस्तक का साइज : 1.84 MB
कुल पृष्ठ : 321

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अरी मैं तो राम के रंग छकी
प्यारे ओशो,
हम खुदा के तो कभी कायल न थे
तुम्हें देखा तो खुदा याद आया।
शबूर सिजदा नहीं है मुझको, तू मेरे सिजदों की लाज रखना
यह सिर तेरे आस्त से पहले, किसी के आगे झुका नहीं है।
और क्या कहूँ, बस अब आप कुछ ऐसी तदबीर करें कि जिससे यह जो एक तीर-ए-नमकश दिल में चुभा है, सीने के पार हो जाए। प्रश्न लिखने के बहाने ही आंसू बह निकले हैं। आप इसका जवाब देंगे तब भी खूब बहेंगे, नहीं देंगे, तब भी। क्या करूं, अब तो बरसात आ ही गई। पर पता नहीं बर का साथ कब होगा? होगा भी या नहीं?
सत्संग का यही अर्थ है। जिस निमित परमात्मा की याद आ जाए, वही सत्संग है। सागर में उठते हुए तूफान को देखकर परमात्मा की याद आ जाए, तो वहीं सत्संग हो गया। आकाश में उगे चांद को देखकर याद आ जाए, तो वहीं सत्संग हो गया। जहां सत्य की याद आ जाए, वहीं सत्य से संग हो जाता है।
और परमात्मा तो सभी में व्याप्त है। इसलिए याद कहीं से भी आ सकती है-किसी भी दिशा से। और परमात्मा तुम्हें सब दिशाओं से तलाश रहा है, खोज रहा है। कहीं से भी रंध्र मिल जाए, जरा सी संधि मिल जाए, तो उसका झोंका तुममें प्रवेश हो जाता है। वृक्षों की हरियाली को देखकर, उगते सूरज को देखकर, पक्षियों के गीत सुनकर, पपीहे की 'पी कहां' की आवाज सुनकर.। और अगर तुम गौर से सुने तो हर आवाज में उसी की आवाज है। तुम्हें अगर मेरी आवाज में उसकी आवाज सुनाई पड़ी, तो उसका कारण यह नहीं है कि मेरी आवाज

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