पुराण विमर्श | Puran Vimarsh

पुराण विमर्श | Puran Vimarsh

पुराण विमर्श | Puran Vimarsh के बारे में अधिक जानकारी :

इस पुस्तक का नाम : पुराण विमर्श है | इस पुस्तक के लेखक हैं : Baldev Upadhyay | Baldev Upadhyay की अन्य पुस्तकें पढने के लिए क्लिक करें : | इस पुस्तक का कुल साइज 27.48 MB है | पुस्तक में कुल 675 पृष्ठ हैं |नीचे पुराण विमर्श का डाउनलोड लिंक दिया गया है जहाँ से आप इस पुस्तक को मुफ्त डाउनलोड कर सकते हैं | पुराण विमर्श पुस्तक की श्रेणियां हैं : inspirational

Name of the Book is : Puran Vimarsh | This Book is written by Baldev Upadhyay | To Read and Download More Books written by Baldev Upadhyay in Hindi, Please Click : | The size of this book is 27.48 MB | This Book has 675 Pages | The Download link of the book "Puran Vimarsh" is given above, you can downlaod Puran Vimarsh from the above link for free | Puran Vimarsh is posted under following categories inspirational |


पुस्तक के लेखक :
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पुस्तक का साइज : 27.48 MB
कुल पृष्ठ : 675

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पुराण में सृष्टि-विद्या का बड़े वैशद्य से वर्णन किया गया है। ‘सर्ग' (सृष्टि) पुराणों के पक्षलक्षणों में से आद्य तथा मुख्य लक्षण है। पौराणिक सृष्टि-विद्या में सांप-दर्शन के द्वारा निर्दिष्ट सृष्टि-विद्या का विशेष अवलम्बन तथा आश्रयण लिया गया है । सांख्य का प्रभाव पुराणों के ऊपर विशेष रूप से पडा है; इसका प्रत्यक्ष प्रत्येक आलोचक को अल्प प्रयास से ही हो सकता है । ध्यातव्य तएव यही है कि पुराण के सृष्टिप्रकरण पर सांख्य का विपुल प्रभाव पड़ा है। अवश्य, परन्तु पौराणिक सृष्टितत्त्व सांख्यीय सृष्टितत्व का अक्षरशः अनुवाद नहीं है। पौराणिक सृष्टिविद्या का अपना वैशिष्ट्य है, स्वातन्त्र्य है, साय मत से प्रभावित होने पर भी उसमे अपना व्यक्तित्व हैं।

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