यूक्रेनी लोक कथाएं | Ukraini Lok Kathayein

यूक्रेनी लोक कथाएं : अज्ञात | Ukraini Lok Kathayein : Unknown

यूक्रेनी लोक कथाएं : अज्ञात | Ukraini Lok Kathayein : Unknown के बारे में अधिक जानकारी :

इस पुस्तक का नाम : यूक्रेनी लोक कथाएं है | इस पुस्तक के लेखक हैं : Unknown | Unknown की अन्य पुस्तकें पढने के लिए क्लिक करें : | इस पुस्तक का कुल साइज 48 MB है | पुस्तक में कुल 247 पृष्ठ हैं |नीचे यूक्रेनी लोक कथाएं का डाउनलोड लिंक दिया गया है जहाँ से आप इस पुस्तक को मुफ्त डाउनलोड कर सकते हैं | यूक्रेनी लोक कथाएं पुस्तक की श्रेणियां हैं : children, inspirational, Stories, Novels & Plays

Name of the Book is : Ukraini Lok Kathayein | This Book is written by Unknown | To Read and Download More Books written by Unknown in Hindi, Please Click : | The size of this book is 48 MB | This Book has 247 Pages | The Download link of the book "Ukraini Lok Kathayein" is given above, you can downlaod Ukraini Lok Kathayein from the above link for free | Ukraini Lok Kathayein is posted under following categories children, inspirational, Stories, Novels & Plays |


पुस्तक के लेखक :
पुस्तक की श्रेणी : , ,
पुस्तक का साइज : 48 MB
कुल पृष्ठ : 247

Search On Amazon यदि इस पेज में कोई त्रुटी हो तो कृपया नीचे कमेन्ट में सूचित करें |
पुस्तक का एक अंश नीचे दिया गया है : यह अंश मशीनी टाइपिंग है, इसमें त्रुटियाँ संभव हैं, इसे पुस्तक का हिस्सा न माना जाये |

* दस्ताने में कौन रहता है ? "
" अरे , हम हैं-चुनमुन चुहिया, फुदकू मेंढक, उड़न-छू खरगोश , चटक-मटक लोमड़ी, भुक्खड़ भेड़िया और झगड़ शूकर! लेकिन तुम कौन हो?"
* अन्दर भीड़ तो बहुत है! पर मेरे भर की जगह निकल ही आएगी ! मैं हूं खौफ़नाक भालू।"
" तुम्हें कैसे अन्दर आने दें? अन्दर तो वैसे ही दम घुटा जा रहा है।" " किसी भी तरह आने दो!" * अच्छा, बस एक सिरे पर टिक जाओ ! "
यह भी अन्दर पहुंच गया। दस्ताने के अन्दर सात-सात जानवर समा गए। टस से मस होने भर की जगह न रह गई। लगा कि दस्तानी अब फटा। अब फेटा।
उधर दादाजी को ख्याल आया कि उनके हाथ का दस्ताना कहीं गिर गया है। वह उसे ढूंढने के लिए वापस लौटे। कुत्ता उनके आगे-आगे भागा। वह दौड़ता गया, दौड़ता गया और आखिर उसे दस्ताना पड़ा दिखाई दिया, पर यह क्या ? दस्ताना तो हिल-डुल रहा है ! कुत्ता तब भौंकने लगा।
दस्ताने में घुसे हुए सारे जानवर डर गए। अपनी जान बचाने के लिए वे दस्ताने से निकलकर जंगल की ओर सिर पर पांव रखकर भागे। तभी दादाजी ने वहां पहुंचकर अपना दस्तानी उठा लिया।

You might also like

Leave A Reply

Your email address will not be published.