संसार में नरक | Sansar Mein Narak

संसार में नरक | Sansar Mein Narak

संसार में नरक | Sansar Mein Narak के बारे में अधिक जानकारी :

इस पुस्तक का नाम : संसार में नरक है | इस पुस्तक के लेखक हैं : Ambika Prasad Vajpeyi | Ambika Prasad Vajpeyi की अन्य पुस्तकें पढने के लिए क्लिक करें : | इस पुस्तक का कुल साइज 37 MB है | पुस्तक में कुल 161 पृष्ठ हैं |नीचे संसार में नरक का डाउनलोड लिंक दिया गया है जहाँ से आप इस पुस्तक को मुफ्त डाउनलोड कर सकते हैं | संसार में नरक पुस्तक की श्रेणियां हैं : Social, society

Name of the Book is : Sansar Mein Narak | This Book is written by Ambika Prasad Vajpeyi | To Read and Download More Books written by Ambika Prasad Vajpeyi in Hindi, Please Click : | The size of this book is 37 MB | This Book has 161 Pages | The Download link of the book "Sansar Mein Narak" is given above, you can downlaod Sansar Mein Narak from the above link for free | Sansar Mein Narak is posted under following categories Social, society |


पुस्तक के लेखक :
पुस्तक की श्रेणी : ,
पुस्तक का साइज : 37 MB
कुल पृष्ठ : 161

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यह नन्हे मियाँ बेचारे किसी अफिस में मुलाजिम थे। दफ्तरों में जैसी ड्यटी होती है, वह तो हरएक को मालूम है । दिन भर अन्धे बैल की तरह हल में जुते रहना और शाम को भी कुछ काम अगर वाकी रह जाय तो घर ले जाकर बारह बजे रात तक माथा-पच्ची करना । यह नन्हे मियाँ भी इसी तरह दिन भर जुते रहते, सुबह नौ बजे दफ्तर जाते, और कभी ५ वजे और कभी ६ बजे शाम को घर वापस आते । मगर इस पर भी नन्हे मियाँ की नन्ही दुलहन का टेम्परेचर कभी नार्मल न रहा नन्हे मियाँ विलकुल अल्ला मियाँ की गाय थे। लड़ाई-दंगा तो दरकिनार, कभी उनसे किसी से तुन-कुन भी न हुई थी। घर-गिरस्ती के मामलों में भी बिलकुल कोरे थे।

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