श्री भक्त माल | Shri Bhaktmal

श्री भक्त माल | Shri Bhaktmal

श्री भक्त माल | Shri Bhaktmal के बारे में अधिक जानकारी :

इस पुस्तक का नाम : श्री भक्त माल है | इस पुस्तक के लेखक हैं : Shri Nabha Ji | Shri Nabha Ji की अन्य पुस्तकें पढने के लिए क्लिक करें : | इस पुस्तक का कुल साइज 40.6 MB है | पुस्तक में कुल 1035 पृष्ठ हैं |नीचे श्री भक्त माल का डाउनलोड लिंक दिया गया है जहाँ से आप इस पुस्तक को मुफ्त डाउनलोड कर सकते हैं | श्री भक्त माल पुस्तक की श्रेणियां हैं : dharm

Name of the Book is : Shri Bhaktmal | This Book is written by Shri Nabha Ji | To Read and Download More Books written by Shri Nabha Ji in Hindi, Please Click : | The size of this book is 40.6 MB | This Book has 1035 Pages | The Download link of the book "Shri Bhaktmal " is given above, you can downlaod Shri Bhaktmal from the above link for free | Shri Bhaktmal is posted under following categories dharm |


पुस्तक के लेखक :
पुस्तक की श्रेणी :
पुस्तक का साइज : 40.6 MB
कुल पृष्ठ : 1035

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श्रीसर्वेश्वर-प्रभुको शृङ्गार एवं भोग-राग आदि सेवा प्राचार्यश्री स्वयं करते हैं । वहाँपर पीठारुड़ होनेके बाद सतत यात्राओं द्वारा सम्पूर्ण भारतके कोने-कोने में वैष्णवता एवं भक्ति-भागीरथी की अजस्रधाराको छापने प्रवाहित किया है। ‘स्पेशल ट्रेन द्वारा समस्त तीर्थोकी यात्रा करते हुए धार्मिक जनताको दिव्य सन्देश दिया-उन्हें सजे एवं कल्याणकारी मार्गेपर अग्रसर किया। इसी प्रकार प्रयाग, हरिद्वार, उज्जैन, नामिक आदि तीर्थोंमें मायोजित समस्त कुम्भों एवं अर्ध-कुम्भोंपर निम्बार्क-नगरका निर्माण कराकर कथा, कीर्तन, सत्संग, सन्त-सेवा, रासलीला, सदुपदेश, यज्ञ आदि के विशाल प्रयोजनों द्वारा जनता के सामने धर्मका आदर्श उपस्थित किया है।

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