श्री वेदान्त प्रश्नोत्तरी | Shri Vedant Prashnottari

श्री वेदान्त प्रश्नोत्तरी | Shri Vedant Prashnottari

श्री वेदान्त प्रश्नोत्तरी | Shri Vedant Prashnottari के बारे में अधिक जानकारी :

इस पुस्तक का नाम : श्री वेदान्त प्रश्नोत्तरी है | इस पुस्तक के लेखक हैं : Swami Narayandas | Swami Narayandas की अन्य पुस्तकें पढने के लिए क्लिक करें : | इस पुस्तक का कुल साइज 38.2 MB है | पुस्तक में कुल 754 पृष्ठ हैं |नीचे श्री वेदान्त प्रश्नोत्तरी का डाउनलोड लिंक दिया गया है जहाँ से आप इस पुस्तक को मुफ्त डाउनलोड कर सकते हैं | श्री वेदान्त प्रश्नोत्तरी पुस्तक की श्रेणियां हैं : dharm

Name of the Book is : Shri Vedant Prashnottari | This Book is written by Swami Narayandas | To Read and Download More Books written by Swami Narayandas in Hindi, Please Click : | The size of this book is 38.2 MB | This Book has 754 Pages | The Download link of the book "Shri Vedant Prashnottari" is given above, you can downlaod Shri Vedant Prashnottari from the above link for free | Shri Vedant Prashnottari is posted under following categories dharm |


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पुस्तक का साइज : 38.2 MB
कुल पृष्ठ : 754

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जिसका विधान किया हो वह कर्म काम्य कहलाना हे | जैम वृष्टि कामना को कारीरीयाग और स्वर्ग कामना को अग्निहोत्र माम यागादि कारीरीयाग किसको कहते है अपने देश में वर्ष की इकट्ठा में यज्ञ के लिये, राजा व प्रजा से उनकी शक्ति के अनुसार' भदा ने फिर उसमे यज्ञ किया जाय उसे कारीरीयाग कहते हैं । नैमिनि कर्म ? जिस कर्म के नहीं करने से पाप हो ओर करने से पून्य-पापम्प फल हो नही और सदा जिसका विधान नहीं किन्तु किमी निमित्त की लेकर विधान किया हो उसको नैमित्तिक कर्म कहते है । कैसे ? जै ग्रहण, श्राद्ध और अवस्थावृद्ध, जातिवृद्ध, आश्रमवृद्ध विद्यावृद्ध, अर्मन और ज्ञानवृद्ध पुरुष के आगमन से उत्थानहप कर्म है ।

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