त्रिपुरारहस्य-चर्याखण्डम | Tripura Rahasya Charyakhandam

त्रिपुरारहस्य-चर्याखण्डम | Tripura Rahasya Charyakhandam

त्रिपुरारहस्य-चर्याखण्डम | Tripura Rahasya Charyakhandam के बारे में अधिक जानकारी :

इस पुस्तक का नाम : त्रिपुरारहस्य-चर्याखण्डम है | इस पुस्तक के लेखक हैं : Dr. Sheetla Prasad Upadhyay | Dr. Sheetla Prasad Upadhyay की अन्य पुस्तकें पढने के लिए क्लिक करें : | इस पुस्तक का कुल साइज 26.3 MB है | पुस्तक में कुल 48 पृष्ठ हैं |नीचे त्रिपुरारहस्य-चर्याखण्डम का डाउनलोड लिंक दिया गया है जहाँ से आप इस पुस्तक को मुफ्त डाउनलोड कर सकते हैं | त्रिपुरारहस्य-चर्याखण्डम पुस्तक की श्रेणियां हैं : jyotish

Name of the Book is : Tripura Rahasya Charyakhandam | This Book is written by Dr. Sheetla Prasad Upadhyay | To Read and Download More Books written by Dr. Sheetla Prasad Upadhyay in Hindi, Please Click : | The size of this book is 26.3 MB | This Book has 48 Pages | The Download link of the book "Tripura Rahasya Charyakhandam" is given above, you can downlaod Tripura Rahasya Charyakhandam from the above link for free | Tripura Rahasya Charyakhandam is posted under following categories jyotish |


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पुस्तक का साइज : 26.3 MB
कुल पृष्ठ : 48

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त्रिपुरारहस्य ग्रन्थ त्रिपुरा-सम्प्रदाय का महत्त्वपूर्ण आकर ग्रन्थ है। इसे शाक्तआगमों की कोटि में उच्च स्थान प्राप्त है। माहात्म्य, ज्ञान और चर्या नाम से यह तीन खण्डों में वर्गीकृत है जो क्रमशः अधिकारी भेद से साधकों और उपासकों को उत्तरोत्तर आवश्यक संस्कार प्रदान करता है। माहात्म्य-खण्ड में भगवती त्रिपुरा का माहात्म्य वर्णित है। उसके श्रवण एवं मनन से भगवती त्रिपुरा में ज्ञान का अधिकार प्राप्त होता है जिसके लिए ज्ञान-खण्ड की उपयोगिता है। तदनन्तर भगवती त्रिपुरा के स्वरूप का सम्यक् ज्ञान,
आत्मा में संचरित होकर, उपासना का अधिकार प्रदान करता है और तब उपासकों के लिए चर्याखण्ड उपयोगी हो जाता है। इस प्रकार से इस ग्रन्थ के तीनों खण्ड परस्पर एक-दूसरे से उत्कृष्टतर सिद्ध होते हैं।

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