उत्कलिकावल्लरि | Utkalikavallari

उत्कलिकावल्लरि | Utkalikavallari

उत्कलिकावल्लरि | Utkalikavallari के बारे में अधिक जानकारी :

इस पुस्तक का नाम : उत्कलिकावल्लरि है | इस पुस्तक के लेखक हैं : Unknown | Unknown की अन्य पुस्तकें पढने के लिए क्लिक करें : | इस पुस्तक का कुल साइज 679 KB है | पुस्तक में कुल 87 पृष्ठ हैं |नीचे उत्कलिकावल्लरि का डाउनलोड लिंक दिया गया है जहाँ से आप इस पुस्तक को मुफ्त डाउनलोड कर सकते हैं | उत्कलिकावल्लरि पुस्तक की श्रेणियां हैं : dharm

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पुस्तक का साइज : 679 KB
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गौरपार्षद प्रवर श्रील रूप गोस्वामी प्रभुने गौर-कृपाभिषिक्त होकर अप्राकृत-रस-शास्त्रके आचार्यके रूपमें जिन समस्त अमूल्य कृतियोंकी रचना की है, श्रीस्तवमाला भी उन्हींमेंसे श्रील रूप गोस्वामीजीकी एक अपूर्व कृति है। श्रीश्रीराधाकृष्ण-सेवा-प्रार्थनामय 'उत्कलिकावल्लरिः' श्रील रूप गोस्वामी द्वारा रचित एवं श्रील जीव गोस्वामी द्वारा संगृहीत इसी श्रीस्तवमालाका एक काव्य-पुष्प है। श्रील रूप गोस्वामिपादकी उन्नत-उज्ज्वल-माधुर्यमयी भक्तिरूपीभ्रमरीके मधुर गुंजनका उच्चादर्श ही इस स्तोत्रमें परिस्फुटित हुआ है।

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