वन्दे वाणी विनायकौ | Vande Vani Vinayako

वन्दे वाणी विनायकौ | Vande Vani Vinayako

वन्दे वाणी विनायकौ | Vande Vani Vinayako के बारे में अधिक जानकारी :

इस पुस्तक का नाम : वन्दे वाणी विनायकौ है | इस पुस्तक के लेखक हैं : SRIRAMVRIKSH BENIPURI | SRIRAMVRIKSH BENIPURI की अन्य पुस्तकें पढने के लिए क्लिक करें : | इस पुस्तक का कुल साइज 08.0 MB है | पुस्तक में कुल 161 पृष्ठ हैं |नीचे वन्दे वाणी विनायकौ का डाउनलोड लिंक दिया गया है जहाँ से आप इस पुस्तक को मुफ्त डाउनलोड कर सकते हैं | वन्दे वाणी विनायकौ पुस्तक की श्रेणियां हैं : Knowledge

Name of the Book is : Vande Vani Vinayako | This Book is written by SRIRAMVRIKSH BENIPURI | To Read and Download More Books written by SRIRAMVRIKSH BENIPURI in Hindi, Please Click : | The size of this book is 08.0 MB | This Book has 161 Pages | The Download link of the book "Vande Vani Vinayako " is given above, you can downlaod Vande Vani Vinayako from the above link for free | Vande Vani Vinayako is posted under following categories Knowledge |


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पुस्तक का साइज : 08.0 MB
कुल पृष्ठ : 161

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हमारी वाणी अब विनायकत्व करे यही है मेरी कामना विनायकों के फेर में हम बहुत रहे । हम वाणी-पुत्र स्वयं सोचें, हम कहाँ हैं, हमें क्या करना है, हम साहित्य को किस दिशा में ले जायें, हमारी भाषा कैसी हो, हमारी लिपि क्या हो कुछ लोगों ने हमें वह जीव समझ रखा है, जिसकी पीठ पर जो भी बोझ, जितना भी बोझ, लाल दो यह स्थिति असत्य है । मेरा मन ही कुछ विद्रोही रहा है। अतः इन निबंधों में यदि आप यथास्थिति के प्रति कभी-कभी झुंझलाहट, क्रोध या विद्रोह पायें, तो मुझे छमा करें।

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