यत्रम-तत्रम | Yatram-Tatram

यत्रम-तत्रम यत्रम-तत्रम | Yatram-Tatram

यत्रम-तत्रम यत्रम-तत्रम | Yatram-Tatram के बारे में अधिक जानकारी :

इस पुस्तक का नाम : यत्रम-तत्रम है | इस पुस्तक के लेखक हैं : Gopal Prasad Vyas | Gopal Prasad Vyas की अन्य पुस्तकें पढने के लिए क्लिक करें : | इस पुस्तक का कुल साइज 2 MB है | पुस्तक में कुल 114 पृष्ठ हैं |नीचे यत्रम-तत्रम का डाउनलोड लिंक दिया गया है जहाँ से आप इस पुस्तक को मुफ्त डाउनलोड कर सकते हैं | यत्रम-तत्रम पुस्तक की श्रेणियां हैं : literature, Stories, Novels & Plays

Name of the Book is : Yatram-Tatram | This Book is written by Gopal Prasad Vyas | To Read and Download More Books written by Gopal Prasad Vyas in Hindi, Please Click : | The size of this book is 2 MB | This Book has 114 Pages | The Download link of the book "Yatram-Tatram" is given above, you can downlaod Yatram-Tatram from the above link for free | Yatram-Tatram is posted under following categories literature, Stories, Novels & Plays |


पुस्तक के लेखक :
पुस्तक की श्रेणी : ,
पुस्तक का साइज : 2 MB
कुल पृष्ठ : 114

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इन गभरात से अमन का है कि यह मुझ निधने गाणे और कान दने गौ दोनों का मान । भाग ना आपल्याण गरेर नास्ति हो तो भी। आस्तिक हो तो माह मणि हि का शान शिव के भुई अशानदग हैं। गुद्धि के देवता हैं, पद विवि के दाता हैं यदि आप नासिर हैं, तो मह राशिए कि हे पर इगो सधारी है। मानी चूहा, जो नयाई पी रह गयी बात है और जिसको भ्रष्टाचार की तरह वन मत है। भू, नो हानौना इमदद भी है और शिरवद भी। वो 1 ए म गया है, शामिलो पो तर उनकी शहामत्ता ने आता है। अगर हान होता तो काप शूणे मर जाते, यह दूई दी हैं जो अपने साथ गारियो पो हार भारत सरकार के पवार नियोजन काम को कीमत बना ।

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