अबरक के फूल | Abrak Ke Phool

अबरक के फूल | Abrak Ke Phool

अबरक के फूल | Abrak Ke Phool के बारे में अधिक जानकारी :

इस पुस्तक का नाम : अबरक के फूल है | इस पुस्तक के लेखक हैं : Yogesh Gupta | Yogesh Gupta की अन्य पुस्तकें पढने के लिए क्लिक करें : | इस पुस्तक का कुल साइज 2MB है | पुस्तक में कुल 159 पृष्ठ हैं |नीचे अबरक के फूल का डाउनलोड लिंक दिया गया है जहाँ से आप इस पुस्तक को मुफ्त डाउनलोड कर सकते हैं | अबरक के फूल पुस्तक की श्रेणियां हैं : Stories, Novels & Plays

Name of the Book is : Abrak Ke Phool | This Book is written by Yogesh Gupta | To Read and Download More Books written by Yogesh Gupta in Hindi, Please Click : | The size of this book is 2MB | This Book has 159 Pages | The Download link of the book " Abrak Ke Phool" is given above, you can downlaod Abrak Ke Phool from the above link for free | Abrak Ke Phool is posted under following categories Stories, Novels & Plays |


पुस्तक के लेखक :
पुस्तक की श्रेणी :
पुस्तक का साइज : 2MB
कुल पृष्ठ : 159

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पुस्तक का एक अंश नीचे दिया गया है : यह अंश मशीनी टाइपिंग है, इसमें त्रुटियाँ संभव हैं, इसे पुस्तक का हिस्सा न माना जाये |

मैं धीरे धीरे मर रहा है। सभी पीरे-धीरे मरते हैं। कुछ ही होशियार | लोग होते हैं जो पचानक मर जाते हैं या मरने का फैसला करते हैं—पौर
मर जाते है। इन सब लोगों के पास जीने के पारण होते हैं। मेरे पास जौने ना कोई कारण नहीं है। यानी मैं जिंदगी भर जीने का कारण ३zता रहा है और इसीलिए शायद धीरे धीरे मर रहा है। धीरे धीरे मरने का कारण कोई न कोई तलाश होती है । यह पता है कि तलाश तो जिंदा रहेगा, पर मिलेगा कुछ नहीं तो मरने की गति और धीमी हो जाती है । धौम चाल से मौत की तरफ अँगना बहुत शानदायक है। पर यह भी सच है कि इस रेंगते हुए प्रादमी को हर त्रास कहीं-न-कहीं सुख का आभास भी कराता है।

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