आदि गुरु शंकराचार्य | Adiguru Shankaracharya

आदि गुरु शंकराचार्य | Adiguru Shankaracharya

आदि गुरु शंकराचार्य | Adiguru Shankaracharya के बारे में अधिक जानकारी :

इस पुस्तक का नाम : आदि गुरु शंकराचार्य है | इस पुस्तक के लेखक हैं : Indra Swapna | Indra Swapna की अन्य पुस्तकें पढने के लिए क्लिक करें : | इस पुस्तक का कुल साइज 24.2 MB है | पुस्तक में कुल 248 पृष्ठ हैं |नीचे आदि गुरु शंकराचार्य का डाउनलोड लिंक दिया गया है जहाँ से आप इस पुस्तक को मुफ्त डाउनलोड कर सकते हैं | आदि गुरु शंकराचार्य पुस्तक की श्रेणियां हैं : dharm, hindu

Name of the Book is : Adiguru Shankaracharya | This Book is written by Indra Swapna | To Read and Download More Books written by Indra Swapna in Hindi, Please Click : | The size of this book is 24.2 MB | This Book has 248 Pages | The Download link of the book "Adiguru Shankaracharya" is given above, you can downlaod Adiguru Shankaracharya from the above link for free | Adiguru Shankaracharya is posted under following categories dharm, hindu |


पुस्तक के लेखक :
पुस्तक की श्रेणी : ,
पुस्तक का साइज : 24.2 MB
कुल पृष्ठ : 248

Search On Amazon यदि इस पेज में कोई त्रुटी हो तो कृपया नीचे कमेन्ट में सूचित करें |
पुस्तक का एक अंश नीचे दिया गया है : यह अंश मशीनी टाइपिंग है, इसमें त्रुटियाँ संभव हैं, इसे पुस्तक का हिस्सा न माना जाये |

देव-वंदित भारतवर्ष के अंतिम दक्षिण प्रांत केरल प्रदेश में स्थित कालाडी ग्राम की पावन व धन्य भूमि पर आविर्भूत मां विशिष्टा देवी एवं पिता शिवगुरु की सुदृढ़ साधना और अखण्ड तपस्या के साक्षात् फल रूप शंकर का भास्वर जीवन सार्वभौमिक सतातन वैदिक धर्म का दिग्दर्शनकारी प्रकाशस्तम्भ है। आचार्य शंकर का अभ्युदय ऐसे समय पर हुआ जबकि विकृत बौद्ध धर्म के दबाव से एवं इस्लाम के सबल व सस्पर्द्ध अभियान तथा अनुप्रवेश से सनातन हिंदू धर्म बलहीन, विध्वस्त और विच्छिन्न हो गया था। परंतु आचार्य शंकर की अलौकिक प्रतिभा, साधना, तत्त्वज्ञान, चरित्रबल, शिक्षा तथा लोककल्याण-भावना ने हिंदू धर्म के भीतर अपूर्व शक्ति का संक्रमण कर वैदिक धर्म को अनंत युगों का स्थायित्व प्रदान कर सुदृढ़ भित्ति के ऊपर सुप्रतिष्ठित किया। इसके लिए दूरदर्शी प्राज्ञ आचार्य ने भारत के चार प्रांतों में चार धर्मदुर्ग-पूर्व में गोवर्धन मठ, पश्चिम में शारदा मठ, उत्तर में ज्योतिर्मठ और दक्षिण में श्रृंगेरी मठ स्थापित किये। ये वेदस्वरूप चारों मठ कुशल प्रहरी की भांति भारत की चारों सीमाओं की रक्षा करते हुए आज भी हिंदू धर्म की विजय-वैजयंती फहरा रहे हैं।

You might also like

Leave A Reply

Your email address will not be published.