भगवान पर विश्वास | Bhagwan Par Vishwas

भगवान पर विश्वास : श्री हनुमान प्रसाद पोद्दार | Bhagwan Par Vishwas : Shri Hanuman Prasad Poddar

भगवान पर विश्वास : श्री हनुमान प्रसाद पोद्दार | Bhagwan Par Vishwas : Shri Hanuman Prasad Poddar के बारे में अधिक जानकारी :

इस पुस्तक का नाम : भगवान पर विश्वास है | इस पुस्तक के लेखक हैं : Shri Hanuman Prasad Poddar | Shri Hanuman Prasad Poddar की अन्य पुस्तकें पढने के लिए क्लिक करें : | इस पुस्तक का कुल साइज 13.1 MB है | पुस्तक में कुल 64 पृष्ठ हैं |नीचे भगवान पर विश्वास का डाउनलोड लिंक दिया गया है जहाँ से आप इस पुस्तक को मुफ्त डाउनलोड कर सकते हैं | भगवान पर विश्वास पुस्तक की श्रेणियां हैं : dharm, others

Name of the Book is : Bhagwan Par Vishwas | This Book is written by Shri Hanuman Prasad Poddar | To Read and Download More Books written by Shri Hanuman Prasad Poddar in Hindi, Please Click : | The size of this book is 13.1 MB | This Book has 64 Pages | The Download link of the book "Bhagwan Par Vishwas" is given above, you can downlaod Bhagwan Par Vishwas from the above link for free | Bhagwan Par Vishwas is posted under following categories dharm, others |


पुस्तक के लेखक :
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पुस्तक का साइज : 13.1 MB
कुल पृष्ठ : 64

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मोहिनी झाँकी दीवती और में आनन्दासका अनुभव करता रहता।।
प्रार्थना के निदष्ट और अन्य समयमें मेरे लिये कोई अन्तर न रहा। पाना शुरुआतीको आज्ञा पाल। के लिये ही मैं निदिए अभयपर एकान्तमें आर्थना करनेको त । प्रार्थनके लिये न तो मुझे उनको आज्ञा सेनेकी अश्या शी और न कि एकाको। बड़े से बड़ा काम भी मेरे मनको प्रभु प्रार्थनासे की मुल नहीं कर सका। | इस बारे में देख सचेत रहा है कि प्रतीक अवस्था एवं कार्य भगवा हो मेरे एकमात्र प्रेमापद हैं। मुझे इसके लिये कभी किसी पध-प्रदर्शककी आता नहीं हुई। क्योंकि में भभके शान पशप एतापूर्वक ]ि रहा
परन्तु गई। अश्या श्री एक धर्मगुरुकीजिसके सामने मैं अपने शगत आपोको प्रकट कर सकता और इस प्रकार सुरू होता। अपने अपराधों के प्रति में सदैव जागरूक है। परन्तु उनके कारन मैं कभी तो नहीं हुआ। भगवान्के सामने मैं अभी अपराधको निष्कपट हृदयसे स्वीकार करता, पशु को इन मा करवाऊँ, ऐसी याप। मैंने कभी नहीं की। भगवान्के समक्ष अपने अपराध पीक करनेके अनन्तर में शान्तिपूर्वक भगनम एवं शक्ति पधभर पूर्वको भौति आ रहा।
जी में ऐसे क्षण भी उपस्थित हुए जय कि मुझे मानसिक वेदनाका सामना करना पड़ा; पर उपचारके सिये मुझे कभी किसी मन्यसे पराग लेनेकी आवश्यकता नहीं हुई: क्योकि भगवश्विासको प्रयोग हुने भगवान सान्निध्यका

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