भरत – मुक्ति | Bharat Mukti

भरत – मुक्ति | Bharat Mukti

भरत – मुक्ति | Bharat Mukti के बारे में अधिक जानकारी :

इस पुस्तक का नाम : भरत – मुक्ति है | इस पुस्तक के लेखक हैं : Acharya Shri Tulsi | Acharya Shri Tulsi की अन्य पुस्तकें पढने के लिए क्लिक करें : | इस पुस्तक का कुल साइज 5 MB है | पुस्तक में कुल 508 पृष्ठ हैं |नीचे भरत – मुक्ति का डाउनलोड लिंक दिया गया है जहाँ से आप इस पुस्तक को मुफ्त डाउनलोड कर सकते हैं | भरत – मुक्ति पुस्तक की श्रेणियां हैं : Poetry

Name of the Book is : Bharat Mukti | This Book is written by Acharya Shri Tulsi | To Read and Download More Books written by Acharya Shri Tulsi in Hindi, Please Click : | The size of this book is 5 MB | This Book has 508 Pages | The Download link of the book "Bharat Mukti " is given above, you can downlaod Bharat Mukti from the above link for free | Bharat Mukti is posted under following categories Poetry |


पुस्तक के लेखक :
पुस्तक की श्रेणी :
पुस्तक का साइज : 5 MB
कुल पृष्ठ : 508

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मनुष्य में पहंति जागृत होने लगी थी; अतः उस 'कुल' का मुखिया कौन हो, यह प्रश्न भी सामने माया। पद-लिप्सा भड़कने लगी थी, परन्तु उसके लिए किसी प्रकार का विपद् उचित नहीं समझा जादा पा। किसी सहज मार्ग की गवेषणा की जा रही थी। एक दिन एक विशेष पटना घटीं । एक युगन स्वेच्छया शन में भ्रमण कर रहा था । सामने से एक उज्ज्वल ब दलिष्ठ हाय मागया । दोनों की पां मिलीं । हामी के हृदय में युगों के प्रति सहज स्नेह जागत हुमा । उसे पपने गत भव की स्मृति हुई, जिससे उसने जाना, हम दोनों ही पश्चिम महाविदेह क्षेत्र में वणिक् पुत्र थे और दोनों में घनिष्ठ मंत्री मी । मह सरत था, अतः महा मनुष्य रूप में उत्पन्न हुभा है और मैं धूर्त-मापाचारी था, अतः इस पशु-योनि में आया है। उसने अपने मित्र को, उसके न चाहने पर भी अपनी पीठ पर बैठा लिया । अन्य मुगलों ने जब इस घटना को देखा तो उन्हे मत प्राप्चर्य हुमा; बमोकि इस अवसर्पण काल में मह मुगल ही सर्वप्रथम चाहना हुमा था। हाथो बहुत विमन या, अतः उस युगल का नाम भी विमलपाहुन प्रसिद्ध हो गया तथा उसे ही प्रथम कुलकर के पद पर शासन किया गया । इस प्रकार कुलकर की नियुक्ति हो जाने से सभी युगल मियाहुन के प्रदेश को मानते और वह सबको व्यवस्था वैता।

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