ढाई आखर प्रेम का | Dhai Aakhar Prem Ka

ढाई आखर प्रेम का | Dhai Aakhar Prem Ka

ढाई आखर प्रेम का | Dhai Aakhar Prem Ka के बारे में अधिक जानकारी :

इस पुस्तक का नाम : ढाई आखर प्रेम का है | इस पुस्तक के लेखक हैं : osho | osho की अन्य पुस्तकें पढने के लिए क्लिक करें : | इस पुस्तक का कुल साइज 525 KB है | पुस्तक में कुल 85 पृष्ठ हैं |नीचे ढाई आखर प्रेम का का डाउनलोड लिंक दिया गया है जहाँ से आप इस पुस्तक को मुफ्त डाउनलोड कर सकते हैं | ढाई आखर प्रेम का पुस्तक की श्रेणियां हैं : inspirational, Spirituality -Adhyatm

Name of the Book is : Dhai Aakhar Prem Ka | This Book is written by osho | To Read and Download More Books written by osho in Hindi, Please Click : | The size of this book is 525 KB | This Book has 85 Pages | The Download link of the book "Dhai Aakhar Prem Ka " is given above, you can downlaod Dhai Aakhar Prem Ka from the above link for free | Dhai Aakhar Prem Ka is posted under following categories inspirational, Spirituality -Adhyatm |


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पुस्तक का साइज : 525 KB
कुल पृष्ठ : 85

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मैं प्रवास में था। लौटा हूं तो तुम्हारा पत्र मिला है। आशा थी कि आया होगा सो आते ही पत्रों के ढेर में सब से पहले उसे खोजा। यह तुमने क्या लिखा है कि कहीं मुझे पत्रों के लिखने में कष्ट तो नहीं हो रहा है। तुम्हारी जीवनयात्रा में किंचित भी सहयोगी हो सकें तो मुझे जो आनंद मिलेगा, उसे शब्द दे ना संभव नहीं है। प्रेम न तो कष्ट जानता है और न भार। प्रेम तो निर्भार है। आनंद के अतिरिक्त उसकी और कोई अनुभूति ही नहीं है। क्या मेरे इस प्रेम का तुम्हें अनुभव नहीं होता है जो मेरे हृदय से पहाड़ी झरनों की भांति से तत वहा जाता है |

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