गायत्री और यज्ञोपवीत | Gayatri Aur Yagyopavit

गायत्री और यज्ञोपवीत | Gayatri Aur Yagyopavit

गायत्री और यज्ञोपवीत | Gayatri Aur Yagyopavit के बारे में अधिक जानकारी :

इस पुस्तक का नाम : गायत्री और यज्ञोपवीत है | इस पुस्तक के लेखक हैं : Shri Ram Sharma Acharya | Shri Ram Sharma Acharya की अन्य पुस्तकें पढने के लिए क्लिक करें : | इस पुस्तक का कुल साइज 01.2 MB है | पुस्तक में कुल 33 पृष्ठ हैं |नीचे गायत्री और यज्ञोपवीत का डाउनलोड लिंक दिया गया है जहाँ से आप इस पुस्तक को मुफ्त डाउनलोड कर सकते हैं | गायत्री और यज्ञोपवीत पुस्तक की श्रेणियां हैं : dharm, Knowledge

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यज्ञोपवीत का भारतीय धर्म में सर्वोपरि स्थान है । इसे द्विजत्व का प्रतीक माना गया है । द्विजत्व का अर्थ है- मनुष्यता के उत्तरदायित्व को स्वीकार करना जो लोग मनुष्यता की जिम्मेदारियों को उठाने के लिये तैयार नहीं, पाशविक वृत्तियों में इतने जकड़े हुए हैं कि महान् मानवता का भार वहन नहीं कर सकते, उनको 'अनुपवीत' शब्द से शास्त्रकारों ने तिरस्कृत किया है और उनके लिए आदेश किया है कि वे आत्मोन्नति करने वाली मण्डली से अपने को पृथक्-बहिष्कृत समझें ।

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