हमारी पुत्रियाँ कैसी हों ? | Hamari Putriya Kaisi Ho ?

हमारी पुत्रियाँ कैसी हों ? | Hamari Putriya Kaisi Ho ?

हमारी पुत्रियाँ कैसी हों ? | Hamari Putriya Kaisi Ho ? के बारे में अधिक जानकारी :

इस पुस्तक का नाम : हमारी पुत्रियाँ कैसी हों ? है | इस पुस्तक के लेखक हैं : Shri Chatursen Shastri | Shri Chatursen Shastri की अन्य पुस्तकें पढने के लिए क्लिक करें : | इस पुस्तक का कुल साइज 08.2 MB है | पुस्तक में कुल 182 पृष्ठ हैं |नीचे हमारी पुत्रियाँ कैसी हों ? का डाउनलोड लिंक दिया गया है जहाँ से आप इस पुस्तक को मुफ्त डाउनलोड कर सकते हैं | हमारी पुत्रियाँ कैसी हों ? पुस्तक की श्रेणियां हैं : inspirational

Name of the Book is : Hamari Putriya Kaisi Ho ? | This Book is written by Shri Chatursen Shastri | To Read and Download More Books written by Shri Chatursen Shastri in Hindi, Please Click : | The size of this book is 08.2 MB | This Book has 182 Pages | The Download link of the book " Hamari Putriya Kaisi Ho ?" is given above, you can downlaod Hamari Putriya Kaisi Ho ? from the above link for free | Hamari Putriya Kaisi Ho ? is posted under following categories inspirational |


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पुस्तक का साइज : 08.2 MB
कुल पृष्ठ : 182

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अब से कुछ वर्ष पूर्व कन्याओं को पढ़ाना पाप समझा जाता था । परन्तु सदैव ही से भारत में कन्याएँ इतनी अपढ़ न धीं । प्राचीन काल में वे ब्रह्मविद्या की अधिष्ठात्री महापण्डिता, प्रबल वाग्विद्या विलासिनी होती थीं । वे सहस्रों विद्वानों की सभाओं में शास्त्रार्थ करके दिग्विजयी पण्डितों के दांत खट्टे करती थीं । संसार के जीवन क्षेत्र में वे अबाध रीति से पुरुषों के समान ही अधिकार रखती थीं । खेद है कि हिन्दूसमाज ने स्वार्थ अौर इन्द्रिय-वासना में फंस कर स्त्रियों को विलास की चीज बनाया उन्हें सब भांति से जकड़ कर विवश कर दिया ।

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