हम्मीरायण | Hammirayan

हम्मीरायण | Hammirayan

हम्मीरायण | Hammirayan के बारे में अधिक जानकारी :

इस पुस्तक का नाम : हम्मीरायण है | इस पुस्तक के लेखक हैं : Dr. Dashrath Sharma | Dr. Dashrath Sharma की अन्य पुस्तकें पढने के लिए क्लिक करें : | इस पुस्तक का कुल साइज 5.1 MB है | पुस्तक में कुल 243 पृष्ठ हैं |नीचे हम्मीरायण का डाउनलोड लिंक दिया गया है जहाँ से आप इस पुस्तक को मुफ्त डाउनलोड कर सकते हैं | हम्मीरायण पुस्तक की श्रेणियां हैं : history

Name of the Book is : Hammirayan | This Book is written by Dr. Dashrath Sharma | To Read and Download More Books written by Dr. Dashrath Sharma in Hindi, Please Click : | The size of this book is 5.1 MB | This Book has 243 Pages | The Download link of the book "Hammirayan " is given above, you can downlaod Hammirayan from the above link for free | Hammirayan is posted under following categories history |


पुस्तक के लेखक :
पुस्तक की श्रेणी :
पुस्तक का साइज : 5.1 MB
कुल पृष्ठ : 243

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राजस्थानी मीणा अपने वीर काव्यों के लिए सर्वत्र प्रसिद्ध हो चुकी हैं। कवि सम्राट श्री रवीन्द्रनाथ ठाकुर के शब्दों में राजस्थान ने अपने रक्त से जो साहित्य निर्माण किया है उसकी जोड़ का साहित्य और कहीं नहीं पाया जाता किन्तु इस बेजोड़ साहित्य में से अभी तक कुछ रन ही हमारे सम्मुख सके हैं। वीर रस के प्रभी अब रणमल छन्द और कान्हडदे प्रबन्ध से परिचित हैं। रतन महेसदासोत री बेचनिका और अचलदास स्त्रीची री वचनिका के सुसम्पादित संस्करण भी अब हमें प्राप्य हैं। वोठू सूजा नगराजौत का ‘राउ जइतसीरउ छन्द' भी मनस्वी इटालियन विद्वान् तेसीतोरी की कृपा से मुद्रित हो चुका है। कुछ प्रकीर्णक रचनाओं का भी प्रकाशन हुआ है।

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