काव्यानुवाद की समस्याएँ | Kavyanuwad Ki Samasyaen

काव्यानुवाद की समस्याएँ | Kavyanuwad Ki Samasyaen

काव्यानुवाद की समस्याएँ | Kavyanuwad Ki Samasyaen के बारे में अधिक जानकारी :

इस पुस्तक का नाम : काव्यानुवाद की समस्याएँ है | इस पुस्तक के लेखक हैं : Bholanath Tiwari | Bholanath Tiwari की अन्य पुस्तकें पढने के लिए क्लिक करें : | इस पुस्तक का कुल साइज 2.8 MB है | पुस्तक में कुल 170 पृष्ठ हैं |नीचे काव्यानुवाद की समस्याएँ का डाउनलोड लिंक दिया गया है जहाँ से आप इस पुस्तक को मुफ्त डाउनलोड कर सकते हैं | काव्यानुवाद की समस्याएँ पुस्तक की श्रेणियां हैं : literature

Name of the Book is : Kavyanuwad Ki Samasyaen | This Book is written by Bholanath Tiwari | To Read and Download More Books written by Bholanath Tiwari in Hindi, Please Click : | The size of this book is 2.8 MB | This Book has 170 Pages | The Download link of the book "Kavyanuwad Ki Samasyaen " is given above, you can downlaod Kavyanuwad Ki Samasyaen from the above link for free | Kavyanuwad Ki Samasyaen is posted under following categories literature |


पुस्तक के लेखक :
पुस्तक की श्रेणी :
पुस्तक का साइज : 2.8 MB
कुल पृष्ठ : 170

Search On Amazon यदि इस पेज में कोई त्रुटी हो तो कृपया नीचे कमेन्ट में सूचित करें |
पुस्तक का एक अंश नीचे दिया गया है : यह अंश मशीनी टाइपिंग है, इसमें त्रुटियाँ संभव हैं, इसे पुस्तक का हिस्सा न माना जाये |

प्रस्तुत पुस्तक 'काव्यानुवाद की समस्याएँ' में 'साहित्य' के अनुवाद की समस्याम्रो पर विचार किया गया है। इसके नाम में 'काव्य' शब्द का प्रयोग 'कविता' के लिए न होकर 'साहित्य' के लिए हुआ है। कहने की प्राबश्यकता नहीं कि 'काय' शब्द का मूल मर्य 'साहित्य' ही है। इसीलिए 'साहित्यशास्त्र' को 'काव्यशास्त्र' कहा जाता है तथा इसीलिए प्राचीन भारतीय परम्परा मे 'साहित्य' की सारी परिभाषाएँ 'काव्य' नाम से ही दी गयी हैं।

You might also like

Leave A Reply

Your email address will not be published.