मूक माटी | Mook Mati

मूक माटी | Mook Mati

मूक माटी | Mook Mati के बारे में अधिक जानकारी :

इस पुस्तक का नाम : मूक माटी है | इस पुस्तक के लेखक हैं : Acharya Vidyasagar | Acharya Vidyasagar की अन्य पुस्तकें पढने के लिए क्लिक करें : | इस पुस्तक का कुल साइज 7 MB है | पुस्तक में कुल 514 पृष्ठ हैं |नीचे मूक माटी का डाउनलोड लिंक दिया गया है जहाँ से आप इस पुस्तक को मुफ्त डाउनलोड कर सकते हैं | मूक माटी पुस्तक की श्रेणियां हैं : Poetry

Name of the Book is : Mook Mati | This Book is written by Acharya Vidyasagar | To Read and Download More Books written by Acharya Vidyasagar in Hindi, Please Click : | The size of this book is 7 MB | This Book has 514 Pages | The Download link of the book " Mook Mati " is given above, you can downlaod Mook Mati from the above link for free | Mook Mati is posted under following categories Poetry |


पुस्तक के लेखक :
पुस्तक की श्रेणी :
पुस्तक का साइज : 7 MB
कुल पृष्ठ : 514

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'मूकमाटी' महाकाव्य का सृजन आधुनिक भारतीय साहित्य की एक उल्लेखनीय उप है। सबसे पहली बात तो यह है कि भाटी जैसी अकिंचन, पद-दलित और तुच्छ वस्तु को महाकाम्या का विषय बनाने की कल्पना ही नितान्त अनोखी है । इस बात यह है कि माटी की तुच्छता में चरम भव्यता के दर्शन करके उसकी विशुद्धता के उपक्रम को मुमित की मगन-यात्रा के रूप में डालना कविता को अध्यात्म के साथ अ-भेद की स्थिति में पहुँचाना है। इसीलिए आचार्यश्री विद्यासागर की कृति 'मूकमाटी' मात्र कवि-कर्म नहीं है, यह एक दार्शनिक सन्त की आत्मा का संगीत है - सन्त जो साधना के औवन्त प्रतिरूप हैं और साधना जो आत्म-विशुद्धि की मञ्चिलो पर सावधानी से पग धरती हुई, लोकमगल को साधती है। वह सन्त तपस्या से अजित जीवन-दर्शन को अनुभूति में रचा-पचा कर सबके हुदय में गुजरित कर देना चाहते हैं। निर्मल-वाणी
और सार्थक संप्रेषण का जो योग इनके प्रवचनों में प्रस्फुटित होता है-उसमे मुक्त छन्द का प्रवाह और काव्यानुभूति की अतरग लय समन्वित करके आचार्यश्री ने इसे काय का रूप दिया है

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